31/01/2014

युद्ध से सबक़ और शान्ति पर चर्चा

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देशों के भीतर होने वाली लड़ाइयों और उनका समाधान तलाशने की ज़िम्मेदारी अक्सर संयुक्त राष्ट्र पर ही पड़ती है इसलिए इस विश्व संस्था का काम और उसके संसाधनों पर बोझ बढ़ जाता है.

संयुक्त राष्ट्र के राजनैतिक मामलों के अध्यक्ष जैफ़री फ़ैल्टमैन ने सुरक्षा परिषद के सामने बुधवार को ये बात कही.

हाल के वर्षों में अनेक देशों में अन्दरूनी संघर्ष देखा गया है

हाल के वर्षों में अनेक देशों में अन्दरूनी संघर्ष देखा गया है

मौक़ा था अनेक देशों में चल रही अन्दरूनी लड़ाइयों से सबक़ सीखने और उनका हल तलाश करके स्थायी शान्ति क़ायम करने के तरीक़ों पर विचार करना.

जैफ़री फ़ैल्टमैन ने सुरक्षा परिषद में हुई इस चर्चा में सीरिया, दक्षिणी सूडान और मध्य अफ्रीकी गणराज्य की मिसाल देते हुए कहा कि इन देशों में लड़ाइयों से संयुक्त राष्ट्र पर ज़िम्मेदारी बनती है कि इनका समाधान तलाश किया जाए.

जैफ़री फ़ैल्टमैन का कहना था, "संयुक्त राष्ट्र के संस्थापकों के दिमाग़ में युद्ध की भयावहता को ख़त्म करने की सोच के समय ये बात भी मौजूद थी कि दुनिया भर में ऐसे कारण मौजूद हैं जिनकी वजह से एक देश दूसरे देश का दुश्मन बनता है."

"हाल के वर्षों में अक्सर संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया गया है कि वो देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने के रास्ते खोजने के बजाय देशों के भीतर होने वाली लड़ाइयों को भी ख़त्म करके शान्ति क़ायम करने के रास्ते निकाले. आज के दौर में ज़्यादा प्रासंगिक ये हो गया है कि देशों के बीच दुश्मनी और युद्ध के मामले तो कम हुए हैं लेकिन देशों के भीतर लड़ाइयों के मामले बढ़ते जा रहे हैं."

उन्होंने सुरक्षा परिषद की चर्चा में ये बात भी रखी कि सम्भवतः इतिहास और पहचानों  को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाना भी दो देशों के बीच और देशों के भीतर होने वाले संघर्षों की वजह बनने में अहम भूमिका निभाता हो.

जैफ़री फ़ेल्टमैन ने इस अवसर पर एक सवाल भी सामने रखा कि किया अन्तरराष्ट्रीय समुदाय और ख़ासतौर पर सुरक्षा परिषद के देश क्या ऐसी सुलह-सफ़ाई और लड़ाइयों के हल निकालने के प्रयासों को अपना सहयोग और सहायता मुहैया करा सकते हैं जिनकी पहल उन्हीं देशों के भीतर से ही की जाती हो.

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