31/01/2014

ख़राब शिक्षा से ख़रबों डॉलर बेकार

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दुनिया भर में बच्चों को अच्छे स्तर की शिक्षा मुहैया कराने में नाकामी की वजह से सरकारों को हर वर्ष लगभग 129 अरब डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ता है.

ये बात अपने आप में कुछ चौंकाने वाली लग सकती है क्योंकि इस नुक़सान को समझना थोड़ जटिल नज़र आ सकता है.

इसे और ज़्यादा स्पष्ट करने के लिए संयुक्त राष्ट्र शिक्षा, विज्ञान और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को ने बुधवार को एक ताज़ा रिपोर्ट पेश की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बच्चों को शिक्षा देने के लिए हर वर्ष जितनी रक़म ख़र्च की जाती है उसमें से लगभग दस प्रतिशत ग़रीब देशों में ख़र्च होती है.

लेकिन क़रीब 129 अरब डॉलर की ये रक़म चूँकि ख़राब शिक्षा पर ख़र्च होती है इसलिए इस ख़र्च के वांछित नतीजे नहीं मिल पाते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि इसकी वजह से ग़रीब देशों में चार में से एक बच्चा कुछ भी पढ़ना लिखना नहीं सीख पाता है.

न्यूयॉर्क स्थित यूनस्को के कार्यालय में निदेशक विबेकी जेनसेन का कहना था, "दुनिया भर में शिक्षा पर नज़र रखने वाली इस 11वीं रिपोर्ट में पता चलता है कि दुनिया भर में हर वर्ष क़रीब 129 अरब डॉलर की रक़म ख़र्च होने के बावजूद क़रीब 25 करोड़ बच्चे अब भी बुनियादी शिक्षा नहीं सीख पाते हैं."

"और बड़ी चिन्ता की बात ये है कि इन 25 करोड़ बच्चों में से क़रीब 13 करोड़ बच्चों ने स्कूल जाकर चार वर्ष की शिक्षा पूरी भी की होती है. इसके बावजूद वो एक वाक्य भी पढ़ना और लिखना नहीं सीख पाए."

रिपोर्ट में निष्कर्ष पेश किया गया है कि अच्छी शिक्षा मुहैया कराने और सुधार लाने के लिए अच्छे शिक्षकों की मौजूदगी सबसे महत्वपूर्ण पहलू है.

रिपोर्ट में सरकारों का आहवान किया गया है कि वो उन बच्चों को अच्छे शिक्षक मुहैया कराएँ जिन्हें उनकी ज़रूरत सबसे ज़्यादा है तभी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.

रिपोर्ट में ये चेतावनी भी दी गई है कि क़ाबिल लोगों को अच्छा शिक्षक बनने के लिए आकर्षित करने और उन्हें अच्छी तरह प्रशिक्षित किए बिना सीखने और शिक्षा मुहैया कराने का सटीक माहौल नहीं बनाया जा सकता.

रिपोर्ट कहती है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो सीखने और शिक्षा की कमी और कठिनता का ये संकट आने वाली कई पीढ़ियों तक जारी रह सकता है.