31/01/2014

फिरौती के लिए अपहरण पर प्रस्ताव

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तमाम देशों का अहवान किया गया है कि फिरौती के लिए किए जाने वाले अपहरण मामलों में चरमपंथियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई फ़ायदा पहुँचने से रोकने के ले पुख़्ता इन्तज़ाम और प्रावधान करने होंगे.

इस ताक़ीद के लिए सुरक्षा परिषद में सोमवार को एक प्रस्ताव पारित किया गया है.

इसमें सदस्य देशों की ज़िम्मेदारी निर्धारित करते हुए कहा गया है कि देशों के फिरौती के लिए किए जाने वाले मामलों में अमरीका पर 11 सितम्बर 2001 के चरमपंथी हमलों के बाद पारित किए गए प्रस्तावों के प्रावधानों के अनूरूप कार्रवाई करनी होगी.

प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद का ये संकल्प भी व्यक्त किया गया है कि अगर फिरौती के लिए कोई अपहरण किया जाता है तो कोई फिरौती या राजनैतिक रियायत दिए बिना ही बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की जाए.

संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत सर मार्क ग्रान्ट ने इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "सुरक्षा परिषद द्वारा ये प्रस्ताव पारित किया जाने ये साबित करता है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय फिरौती के लिए किए जाने वाले अपरहण की चुनौती से निपटने के लिए संकल्पबद्ध है."

"फिरौती के लिए अपहरण किया जाना चरमपंथी गुटों के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर रक़म जुटाने के एक ज़रिया बन चुका है और तमाम देशों के नागरिकों के लिए एक बड़ा ख़तरा भी."

सर मार्क ग्रान्ट ने कहा कि इस बारे में अलग-अलग राय हो सकती हैं लेकिन हमारे अनुमान के मुताबिक़ पिछले क़रीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान चरमपंथी गुटों ने फिरौती के रूप में लगभग साढ़े दस करोड़ डॉलर की रक़म वसूली है.

उन्होंने सुरक्षा परिषद ने पहली बार सदस्य देशों का आहवान किया है कि वो फिरौती के लिए होने वाले अपहरण मामलों में कोई रियायत या रक़म दिए बिना ही बंधकों को रिहा कराने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करें.

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