24/01/2014

भुखमरी का सामना ‘ज़ीरो हंगर चैलेंज’ से

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विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक स्विटज़रलैंड के डावोस शहर में हुई है जिसमें दुनिया भर से लगभग ढाई हज़ार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

इनमें राजनीतिक, व्यवासाइयों और टैक्नोलॉजी क्षेत्र के अलावा ग़ैरसरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी इस सम्मेलन में शिरकत की.

इस वार्षिक बैठक में विश्व की मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरण सम्बन्धी मुद्दों पर चर्चा हुई. इस वर्ष की बैठक में सबसे ज़्यादा ज़ोर जलवायु परिवर्तन पर रहा क्योंकि शुक्रवार को जलवायु दिवस के रूप में भी मनाया गया.

इस अवसर पर निजी और सरकारी क्षेत्रों से अनुरोध किया गया है कि वो दुनिया भर में भोजन की कमी की समस्या दूर करने में बढ़चढ़कर योगदान करें.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने विश्व आर्थिक मंच में अपने दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर ये संदेश जारी किया है.

ऐसा अनुमान है कि दुनिया भर में क़रीब 84 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें भरपेट खाना नहीं मिलता जिसकी वजह से वो कुपोषण के भी शिकार हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भोजन की कमी की समस्या से निपटने के लिए अपने नए अभियान को नाम दिया है – ज़ीरो हंगर चैलेंज.

इस अभियान के तहत संयुक्त राष्ट्र ने तमाम नेताओं से अनुरोध किया है को भोजन की कमी की समस्या को जल्द से जल्द ख़त्म किया जाए.

जिनेवा में विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रवक्ता एलिज़ाबेथ बिर्स का कहना था, “कुपोषण और भरपेट भोजन नहीं मिलना सिर्फ़ स्वास्थ्य सम्बन्धी मुद्दे नहीं हैं बल्कि ये आर्थिक चिन्ताओं का भी विषय हैं. इसीलिए तमाम देश और तमाम वैश्विक कम्पनियाँ इस चुनौती का सामना कर रही हैं और इस चिन्ता में शामिल हैं.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम कहना है कि ज़ीरो हंगर अभियान के लिए आधार बहुत मज़बूत है इसलिए एकजुट होकर ऐसे प्रयास करने की सख़्त ज़रूरत है जिनके बाद दुनिया भर में कोई भी व्यक्ति भूखा ना रह पाए.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने अफ्रीका के हालात का उदाहरण देते हुए कहा है कि बच्चों में शुरू से ही कुपोषण हो जाता है तो वो महामारी का रूप ले लेता है जिसके पूरे जीवन पर नकारात्मक असर पड़ते हैं और व्यक्ति का जीवन बीमारियों से घिर जाता है.