17/01/2014

मिलिशिया गुटों पर नरसंहार के आरोप

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संयुक्त राष्ट्र ने आरोप लगाया है कि सीरिया में हथियारबन्द मिलिशिया गुट अपनी हिरासत में रखे गए लोगों की खुलेआम हत्याएँ कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय –OHCHR ने ये भी कहा है कि ये मिलिशिया गुट आम लोगों की भी हत्याएँ कर रहे हैं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार ऐसी ख़बरें मिली हैं कि मिलिशिया गुटों ने अलेप्पो, इदलिब और रक़्क़ा में आम लोगों की हत्याएँ की हैं. इनके अलावा ऐसे लड़ाकों की भी हत्याएँ किए जाने की ख़बरें मिली हैं जो लड़ाई में हिस्सा नहीं ले रहे थे.

ख़बरों में कहा गया है कि ये हत्याएँ सख़्त रुख़ अपनाने वाले मिलिशिया गुटों के हाथों की गई बताई गई हैं. इनमें ख़ासतौर से इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक़ एंड सीरिया (ISIS) का नाम प्रमुखता से लिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने सीरिया में मिलिशिया गुटों आगाह किया है कि इस तरह आम लोगों और क़ैदियों की हत्याएँ करना अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार और मानवीयता के क़ानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है. इतना ही नहीं, इस तरह की हत्याएँ युद्धापराधों के दायरे में भी आ सकती हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय –OHCHR के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविले का कहना था, “ऐसा देखने में आया है कि जब कुछ लोगों या लड़ाकों को किसी गुट के इलाक़े से भगा दिया जाता है तो वो अन्य गुटों के हाथ लग जाते हैं. फिर इनमें से कुछ ऐसे लोगों को मार दिया जाता है जिन्हें वो बन्दी बनाकर रखते हैं. अलेप्पो में ऐसा ही हुआ लगता है.”

“ये लोग क़ैदी की श्रेणी में आते हैं. ये वो लोग हैं जिन्हें इन गुटों ने बन्दी बनाया है और ऐसे लोगों की हत्या करना स्पष्ट रूप से अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है. हम इन गुटों को स्पष्ट शब्दों में बता देना चाहते हैं कि अन्य पक्षों की ही तरह ये गुट भी अन्तरराष्ट्रीय क़ानूनों के दायरे में आते हैं.”

उन्होंने कहा कि अगर कोई युद्धापराध हुए हैं तो उनके सबूत एकत्र किए जाएंगे और ज़िम्मेदार गुटों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा.

मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने सीरिया संकट में शामिल तमाम पक्षों से ज़ोरदार शब्दों में कहा कि जो भी लोग उनकी हिरासत में आते हैं उनके साथ मानवीय और सम्मानजनक बर्ताव किया जाए.

इसके अलावा ये भी माँग की गई है कि अवैध रूप से हिरासत में लिए गए लोगों को तुरन्त रिहा कर दिया जाए क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत इन लोगों को उनकी आज़ादी से वंचित नहीं किया जा सकता.