10/01/2014

जॉर्डन वीटो में सुधार के लिए प्रयासरत

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जॉर्डन ने जनवरी महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता सम्भाली है.

ये ज़िम्मेदारी सम्भालते ही जॉर्डन ने कहा है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों द्वारा वीटो का जिस तरीक़े से प्रयोग किया जाता है, उसमें कुछ सुधार लाने की कोशिश किया जाएगा.

ख़ासतौर से जॉर्डन का कहना है कि नरसंहार वाले युद्धापराधों या मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के मामलों पर जब फ़ैसला लेने का समय होता है तो वीटो का इस्तेमाल ना किया जाए, इसके लिए भरपूर कोशिश की जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र में जॉर्डन प्रतिनिधि प्रिन्स ज़ायद राआद ज़ायद अल हुसैन ने कहा कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के काम करने के तरीक़े में सुधार लाने की दिशा में काम करता रहेगा.

उन्होंने कहा कि ख़ासतौर से वीटे के अधिकार और प्रयोग के मामले में काफ़ी सुधार की ज़रूरत है जो सिर्फ़ पाँच स्थायी सदस्यों के पास है जबकि सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य होते हैं.

प्रिन्स ज़ायद राआद ज़ायद अल हुसैन का कहना था, "हमारा विश्वास है कि नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और युद्धापराधों जैसे मामलों में चर्चा और कोई फ़ैसला लेते समय वीटो के अधिकार का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए."

"इस सन्दर्भ में हम फ्रांस द्वारा शुरू किए गए कुछ उपायों का ज़ोरदार स्वागत करते हैं जिसमें हमारे विचार से सहमति व्यक्त की गई है. हम उम्मीद करते हैं कि इस पहल पर और समर्थन जुटाया जा सकेगा और आम राय बनाई जा सकेगी."

जॉर्डन ने सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में अपना दो वर्ष का कार्यकाल शुरू किया है. ग़ौरतलब है कि सुरक्षा परिषद में 10 अस्थाई सदस्य भी होते हैं जो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं.

सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य हैं – अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन.

इन देशों के पास वीटो का अधिकार है जिसका मतलब है कि इनमें से कोई भी देश अगर किसी भी फ़ैसले या नीति पर वीटो के अधिकार का इस्तेमाल कर देता है तो वो सुरक्षा परिषद से पारित नहीं होगा.

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