27/12/2013

भोजन बर्बादी रोकने के लिए एकजुटता

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दुनिया भर में हर वर्ष जितना भोजन तैयार होता है उसमें से एक तिहाई यानी लगभग 1 अरब 30 करोड़ टन बर्बाद चला जाता है. ये बर्बाद जाने वाला भोजन इतना होता है कि उससे दो अरब लोगों की खाने की ज़रूरत पूरी हो सकती है.

विश्व भर में होने वाली भोजन बर्बादी को रोकने के लिए विश्व खाद्य और कृषि संगठन (FAO), अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने एकजुट होकर एक परियोजना शुरू की है.

संयुक्त राष्ट्र की ये तीनों एजेंसियाँ विश्व में भोजन बर्बादी रोकने के लिए 27 लाख डॉलर की लागत वाली इस परियोजना पर मिलकर काम करेंगी.

ख़ासतौर पर विकासशील देशों में भोजन बर्बादी रोकने की इस परियोजना को स्विटज़रलैंड की विकास सहयोग एजेंसी ने रक़म मुरैया कराई है.

फ़सल पकने पर उसे खेतों से इकट्ठा करने, उसके परिवहन और भंडारण के दौरान ज़्यादा भोजन बर्बादी होती है, उस पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा क्योंकि ऐसा ढाँचा, तकनीक और हुनर की कमी होती है जिससे भोजन बर्बादी को रोका जा सके.

तीन वर्ष की इस परियोजना के दौरान अनाज की बर्बादी को रोकने के प्रयास किए जाएंगे जिनमें मक्का, चावल, दालें और लोबिया शामिल हैं. ये अनाज दुनिया भर में लोगों को पर्याप्त मात्रा में खाना उपलब्ध कराते हैं.

साथ ही, उनके उत्पादन पर करोड़ों किसानों की जीविका भी निर्भर है.

संयुक्त राष्ट्र की ये परियोजना खाद्य पदार्थों की उपलब्धता में बेहतरी लाने के सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगी.

इन लक्ष्यों में खाने की बर्बादी बिल्कुल रोकने को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है.

खाद्य और कृषि संगठन के कार्यक्रम सहयोग विभाग के निदेशक जॉन जिन किम ने तीनों एजेंसियों की तरफ़ से बोलते हुए कहा कि “भोजन बर्बादी में कमी करने से ज़ाहिर सी बात है कि भोजन पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी. इन प्रयासों के तहत वर्ष 2050 तक बढ़ती जनसंख्या की ज़रूरत पूरी करने के लिए जो अतिरिक्त 60 प्रतिशत भोजन उत्पादन की ज़रूरत पड़ेगी, उसे पर्यावरण को कम नुक़सान पहुँचाए बिना ही किया जा सकेगा.”

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