20/12/2013

जानवरों से मिलने वाले खाने से बेक़ाबू होती बीमारियाँ

सुनिए /

पशुओं से फैलने वाली बीमारियों ने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं.

विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन यानी FAO की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती आबादी, कृषि विस्तार और खाद्य पदार्थ मुहैया कराने वाले सुपरस्टोर श्रंखलाओं की वजह से बीमारियाँ होने की चुनौती ने नया रूप ले लिया है.

लोग जानवरों से निकलने वाले खाने के ज़्यादा शौकीन हो गए हैंरिपोर्ट कहती है कि अब नई नई बीमारियाँ पशुओं में पैदा होकर इंसानों में भी फैलने लगी हैं और उनका चिन्ताजनक रफ़्तार से विस्तार हो रहा है.

रिपोर्ट आगाह करते हुए तर्क देती है कि पशुओं और इंसानों के एक साथ रहने और पशुओं का माँस खाने से बीमारियाँ इंसानों में फैलने के इस माहौल में बीमारियों का सामना करने के लिए एक बिल्कुल नई सोच और नई रणनीति अपनाए जाने की ज़रूरत है.

इस रिपोर्ट को नाम दिया गया है – World Livestock 2013: Changing Disease Landscapes.

रिपोर्ट कहती है कि हाल के दशकों में इंसानों में जो बीमारियाँ देखी गई हैं उनमें से क़रीब 70 प्रतिशत पशु-पक्षियों से आई हैं.

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इंसान ज़्यादा से ज़्यादा ऐसा भोजन खाने के लिए आतुर हो रहा है जिनका स्रोत पशु-पक्षी होते हैं यानी ऐसा भोजन जो या तो माँस पर आधारित होता है या फिर पशु-पक्षियों से निकलता है.

विश्व खाद्य और कृषि संगठन की ये ताज़ा रिपोर्ट इस समस्या का मुक़ाबला करने के लिए अनेक उपाय गिनाती है.

रिपोर्ट कहती है कि ख़ासतौर से विकासशील देशों में तरह-तरह की बीमारियाँ बढ़ने के साथ-साथ विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए भी ख़तरा बढ़ रहा है.

पशु-पक्षियों में बार-बार होने वाली महामारियों की वजह से ना सिर्फ़ उनका ख़ुद का जीवन और अस्तित्व ख़तरे में पड़ता है बल्कि इंसानों के लिए खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित होती है.

इसका नकारात्मक असर ग़रीब और धनी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में समान रूप से पड़ता है.

एफ़ ए ओ के कृषि और उपभोक्ता संरक्षण मामलों के सहायक महानिदेशक रेन वांग का कहना था कि इसका साफ़ मतलब है कि मानव स्वास्थ्य की समस्याओं से निपटने की प्रक्रिया में पशु-पक्षियों की स्वास्थ्य समस्याओं की अनदेखी नहीं की जा सकती, इसमें स्वास्थ्य सम्बन्धी पूरा वातावरण जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा कि इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़कर देखना होगा और बीमारियों के स्रोत पर ही ध्यान देना होगा.

ये भी देखना होगा कि ख़तरनाक बीमारियाँ कहाँ से और किस तरह फैलती हैं और कहाँ-कहाँ कितना असर करती हैं.

रेन वांग का कहना था कि सिर्फ़ बीमारी के इलाज पर ध्यान देने से ठोस फ़ायदा नहीं होने वाला है.

Loading the player ...

कनेक्ट