6/12/2013

खाद्य कमी को पूरा करने के लिए हल

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एक ताज़ा शोध में दुनिया भर में बढ़ती खाद्य पदार्थों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कुछ समाधान सुझाए गए हैं जिनमें आर्थिक विकास और पर्यावरण स्थिरता को आगे बढ़ाना ज़रूरी बताया गया है.

एक ताज़ा विश्लेषण में कहा गया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया भर को अब के मुक़ाबले 70 प्रतिशत ज़्यादा भोजन की ज़रूरत होगी जो दुनिया भर की क़रीब नौ अरब, 60 करोड़ आबादी की कैलोरीज़ की ज़रूरत पूरी कर सके.

खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और ज़रूरत के बीच के अन्तर को ज़्यादा उत्पादक तरीक़े और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करके भरा जा सकता है.

इसके लिए ज़रूरी है कि लोगों की खान-पान की आदतों को ज़्यादा किफ़ायती बनाया जाए जिनमें खाद्य पदार्थों की बर्बादी को भी रोकना शामिल हो.

ये नए नतीजे और विश्लेषण विश्व संसाधन रिपोर्ट में पेश किए गए हैं जिसे विश्व संसाधन संस्थान यानी डब्ल्यू आर आई ने तैयार किया है.

इसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम – यूएनडीपी, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम – यूएनईपी और विश्व बैंक ने भी सहयोग दिया है.

इस रिपोर्ट को दक्षिण अफ्रीका के जोहनसबर्ग में कृषि, खाद्य, पोषण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर तीसरे विश्व सम्मेलन के दौरान जारी किया गया है.

रिपोर्ट में ये समाधान भी पेश किया गया है कि खाद्य पदार्थों के ज़्यादा उपभोग और बर्बादी को कम करके किस तरह से भोजन उपलब्धता की क़िल्लत को दूर किया जा सकता है.

इसमें कहा गया है कि अगर भोजन बर्बादी को वर्ष 2050 तक आधा भी कर दिया जाए तो भी भोजन उपलब्धता और ज़रूरत के बीच के अन्तर को 20 प्रतिशत भरा जा सकता है.

एक और तरीक़ा ये बताया गया है कि अगर पशु आधारित भोजन की खपत को कर दिया जाए, यानी सब्ज़ियों और फलों का सेवन ज़्यादा किया जाए तो भोजन की ज़रूरत को काफ़ी हद तक पूरा किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक अचिम स्टीनर का कहना था कि विश्व को अगर सही मायनों में स्थिर और टिकाऊ बनाना है तो हमें प्राकृतिक संसाधनों के उत्पादन और उनकी खपत के तरीक़ों को बदलना होगा.

उन्होंने कहा कि अगर हम ज़मीन से उगने वाली चीज़ों के सही उपभोग और खपत में प्राकृतिक नियमों का पालन करें तो ना सिर्फ़ खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी बल्कि वो प्रक्रिया, प्रणाली और व्यवस्था भी सुधरेगी जिस पर भोजन उत्पादन निर्भर होता है.