6/12/2013

ऑनलाइन या ऑफ़लाइन, मानवाधिकार हर हाल में सुनिश्चित हों

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा है कि जब भी वर्ल्ड वाइड वेब (www) या इंटरनेट के बारे में कोई चर्चा हो, मानवाधिकार सुनिश्चित करने का मुद्दा हमेशा सबसे अहम होना चाहिए.

गुरूवार को जिनेवा में एक कार्यक्रम में नवी पिल्लई ने कहा कि एक तरफ़ तो सूचना तकनीक में हुई प्रगति की बदौलत मानवाधिकारों के में बारे में जागरूकता बढ़ रही है लेकिन दूसरी तरफ़ इंटरनेट और सूचना प्रोद्योगिकी के ज़रिए मानवाधिकारों का उल्लंघन भी हो रहा है.

नवी पिल्लई ने कहा कि साईबर प्लैटफ़ार्म के ज़रिए लोगों-बच्चों-महिलाओं को डराने-धमकाने और परेशान करने के मामले भी बढ़ रहे हैं, साथ ही साईबर तकनीक के ज़रिए घृणा फैलाना और लोगों के निजी अधिकारों और क्षेत्र में दख़ल देने की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं.

नवी पिल्लई का कहना था, “एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि World Wide Web के बारे में अगर कोई भी चर्चा या विचार विमर्श होता है तो मानवाधिकार उसकी धुरी होने चाहिए.”

“अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून को हर समय और हर स्थान पर लागू किया जाना और उसका सम्मान किया जाना है, चाहे ऑनलाइन हो या ऑफ़लाइन.”

नवी पिल्लई ने कहा “जिन लोगों ने मानवाधिकारों का सार्वभौम घोषणा-पत्र तैयार किया था उन्होंने अनुच्छेद 19 का प्रावधान करके आज के दौर के तकनीकी विकास को भी शामिल कर लिया था.”

“इसमें प्रावधान किया गया है कि सभी को अपनी राय ज़ाहिर करने का अधिकार है और इस पर कोई भी मीडिया और सीमाओं का बन्धन लागू नहीं होता यानी हर जगह और प्लैटफ़ॉर्म पर ये अधिकार लागू होते हैं.”

World Wide Web का आविष्कार करने वाले ब्रितानी कम्प्यूटर वैज्ञानिक सर टिम बरनर्स भी इस अवसर पर मौजूद थे.

ये कार्यक्रम 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया.