29/11/2013

महिलाओं पर हिंसा रोकने के लिए मानसिकता बदलने की पुकार

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महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा बन्द करने के लिए 25 नवम्बर को मनाए गए अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर भारत की राजधानी दिल्ली में पहले संयुक्त राष्ट्र पब्लिक लैक्चर का आयोजन किया गया.

इस भाषण में भारत की अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल इन्दिरा जय सिंह ने व्यवस्था से जुड़े तमाम अधिकारियों का आहवान किया कि यौन अपराधों का शिकार होने वाली लड़कियों, युवतियों और महिलाओं को पूरा संरक्षण देने के लिए ऐसे ठोस क़दम उठाए जाएँ जिनसे न्याय व्यवस्था असरदार तरीक़े से काम कर सके.

इस अवसर पर इन्दिरा जय सिंह ने कहा कि भारत में न्यायिक व्यवस्था यौन अपराधों का शिकार होने वाली महिलाओं के माफ़िक नहीं हैं और सिर्फ़ मुल्ज़िमों के अधिकारों पर ही ध्यान देती है.

उन्होंने कहा कि यौन अपराधों के अभियुक्तों यानी मुल्ज़िमों को सज़ा दिलवाने के लिए और ज़्यादा प्रावधान किए जा सकते हैं.

इन्दिरा जय सिंह ने कहा, "हमें सुनिश्चित करना होगा कि यौन अपराधों की शिकार महिला और उसके परिवार को हर स्तर पर विश्वास में लिया जाए और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए. हमें प्रभावित महिलाओं में आत्मविश्वास जगाना होगा ताकि वो क़ानूनी प्रक्रिया में भरोसे के साथ हिस्सा ले सकें."

इन्दिरा जय सिंह ने गत वर्ष दिसम्बर में दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा को बन्द करने में हुई प्रगति पर ध्यान दिलाया.

उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद यौन अपराध क़ानून में तो इस वर्ष मार्च में बदलाव कर दिए गए थे लेकिन उन्हीं के अनुरूप बाक़ी क़ानूनों में बदलाव नहीं किए गए, और ना ही कोई ऐसी व्यवस्था विकसित की गई जिसके ज़रिए यौन अपराधों का शिकार होने वाली महिलाओं को ठोस सहायता और समर्थन दिया जा सके.

इन्दिरा जय सिंह ने कहा कि यौन अपराधों का शिकार होने वाली महिलाओं को ही दोषी ठहराने की मानसिकता बन्द होनी चाहिए क्योंकि इससे वो इन मामलों को क़ानून की नज़र में लाने से डरती हैं.

साथ ही यौन अपराधों की शिकायतों का निपटारा क़ानूनी दख़ल के बिना करने के चलन को भी बन्द करना होगा, तभी कामकाज के स्थानों पर होने वाली यौन अपराधों की घटनाओं को रोका जा सकेगा.

इच्छाशक्ति की ज़रूरत

इन्दिरा जय सिंह का ये बयान तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल के मामले में और सटीक साबित होता है.

ग़ौरतलब है कि तरुण तेजपाल पर तहलका में ही काम करने वाली एक महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है जिससे कामकाज के स्थानों पर महिलाओं के यौन शोषण मुद्दे पर एक नई बहस छिड़ गई है.

भारत में संयुक्त राष्ट्र और यूएनडीपी की प्रतिनिधि लीज़ा ग्रान्डे ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बन्द करना संयुक्त राष्ट्र की उच्च प्राथमिकता है.

संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन की भारत, श्रीलंका, भूटान और मालदीव के लिए प्रतिनिधि डॉक्टर रीबेका रीचमैन ट्रेवेर्स का कहना था कि दिसम्बर की घटना ने भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा के मुद्दे पर व्यापक ध्यान केंद्रित कर दिया है.

उस घटना के बाद अनेक प्रगतिशील बदलाव हुए हैं लेकिन सिर्फ़ क़ानून बनाने भर से ऐसी समस्याओं और चुनौतियों से नहीं निपटा जा सकता, क़ानूनों को असरदार तरीक़े से लागू करना भी बहुत ज़रूरी है.

इसके अलावा महिलाओं और पुरुषों के साथ-साथ पूरे समाज की मानसिकता को बदलना भी बहुत ज़रूरी है.

संयुक्त राष्ट्र पब्लिक लैक्चर का आयोजन संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के यूनाइट (UNiTE) अभियान के तहत किया गया जिसका उद्देश्य महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा को रोकना है.

संयुक्त राष्ट्र लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकने के लिए विभिन्न सरकारों, सिविल सोसायटी, युवाओं, मीडिया और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर प्रयास कर रहा है ताकि लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी बढ़ाई जा सके.

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