29/11/2013

कुपोषण के इलाज लिए नए दिशानिर्देश

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विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO ने पाँच वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों के इलाज के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए हैं जो गम्भीर कुपोषण का शिकार हैं.

दुनिया भर में क़रीब दो करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो गम्भीर कुपोषण का सामना कर रहे हैं.

ऐसे बच्चों में रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित नहीं हो पाती क्योंकि उन्हें स्वास्थ्यप्रद खाना नहीं मिल पाता, इसके अलावा उनके कुपोषण का सही तरीक़े से इलाज भी नहीं हो पाता.

जिन बच्चों में चिकिस्ता सम्बन्धी कोई जटिलता नहीं है तो उनका इलाज ख़ास तौर पर तैयार की गई भोजन सामग्री के ज़रिए घर पर ही किया जा सकता है जिससे इन बच्चों का पोषण बढ़े और उनमें ऊर्जा बढ़े.

साथ ही कुछ रोग प्रतिरोधी दवाएँ भी दी जा सकती हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य और विकास के लिए पोषण विभाग के निदेशक डॉक्टर फ्रान्सेस्को ब्रेन्का का कहना था, "अब हमारे पास ऐसे खाद्य पदार्थ मौजूद हैं जिनसे ऊर्जा मिलती है और जिन्हें कुपोषण के शिकार बच्चे आसानी से खा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर इस भोजन सामग्री का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए तो बच्चों में कुपोषण की चुनौती से निपटा जा सकता है और बच्चों की मौत को रोका या कम किया जा सकता है."

"साथ ही एच आई वी से संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए और भी ज़्यादा बेहतर तकनीक और समझदारी अपनानी होगी. इसके अलावा इस बारे में और भी ज़्यादा साफ़गोई और स्पष्टता दिखानी होगी कि छह महीने से कम उम्र के बच्चों के साथ कैसे पेश आया जाए और उनकी समस्याओं और चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए."

अब से 15 वर्ष पहले जारी की गए संगठन के दिशा निर्देशों में कहा गया था कि गम्भीर कुपोषण के शिकार सभी बच्चों को तुरन्त अस्पतालों में भर्ती कराया जाए, उन्हें ख़ास पोषक तत्व मिलाकर दूध में पिलाए जाएँ. और सटीक इलाज किया जाए जिसमें रोग प्रतिरोधी दवाएँ देना शामिल बताया गया था.

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