22/11/2013

साफ़-सफ़ाई को विकास मुद्दा बनाया जाए

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संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को प्रथम विश्व शौचालय दिवस मनाया जिस अवसर पर कहा गया है कि दुनिया भर में साफ़-सफ़ाई पर समुचित ध्यान नहीं दिए जाने की वजह से क़रीब ढाई अरब लोगों को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है.

साफ़-सफ़ाई ना रखने की वजह से इन लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही महिलाओं और लड़कियों व्यक्तित्व और सशक्तीकरण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.

एक बड़ी चिन्ता की बात ये भी है कि गन्दगी में रहने की वजह से हर वर्ष क़रीब आठ लाख बच्चे डायरिया और तमाम अन्य बीमारियों की वजह से अपनी जान गँवा देते हैं.

अलावा साफ़-सफ़ाई का समुचित ध्यान नहीं रख पाने की वजह से लाखों अन्य बच्चे गम्भीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं जिससे लम्बी अवधि की स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा हो जाती हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस अवसर पर कहा कि बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि जिन लोगों को समुचित शौचालय और साफ़-सफ़ाई उपलब्ध नहीं है, ऐसे लोगों की संख्या घटाने का लक्ष्य अब भी बहुत दूर नज़र आता है जबकि ये सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों यानी एमडीजी का एक हिस्सा है.

बान की मून ने कहा कि साफ़-सफ़ाई को 2015 के बाद तय किए जाने वाले लक्ष्यों में भी प्रमुखता से शामिल करना होगा और ये भी देखना होगा कि साफ़-सफ़ाई सुनिश्चित करना ज़्यादा महंगा काम ना हो और ये किसी जटिल तकनीक पर भी निर्भर ना हो.

संयुक्त राष्ट्र की जल आपूर्ति और साफ़-सफ़ाई सहयोग परिषद द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में हर तीन में से  एक महिला को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है जिसकी वजह से उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है.

ऐसा करने में उन्हें शर्मिन्दगी का सामना तो करना ही पड़ता है, उन्हें बीमारियाँ भी लग जाती हैं और कुछ मामलों तो उन पर यौन हमले भी हो जाते हैं.

जल आपूर्ति और साफ़-सफ़ाई सहयोग परिषद के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर क्रिस्टोफ़र विलियम्स का कहना था कि विश्व शौचालय दिवस दरअसल इसलिए मनाया गया है ताकि साफ़-सफ़ाई की तरफ़ लोगों का ध्यान आकर्षित किया जा सके और इसके लिए ठोस क़दम उठाए जा सकें.

इस मौक़े पर ये भी ध्यान दिलाए जाने की ज़रूरत है कि साफ़-सफ़ाई का सीधा सम्बन्ध स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत मानवाधिकारों से भी है.

उन्होंने बताया कि इस वर्ष ख़ास ज़ोर महिलाओं की साफ़-सफ़ाई से जुड़े मुद्दों पर दिया जा रहा है. साफ़-सफ़ाई की समुचित व्यवस्था और सुविधाएँ नहीं होने की वजह से बहुत सी छात्राएँ स्कूल नहीं जा पाती हैं जिससे उनकी शिक्षा का नुक़सान होता है.

एक अनुमान के अनुसार क़रीब 28 प्रतिशत छात्राएँ मासिक धर्म के दौरान स्कूलों और कॉलेजों में समुचित सुविधाएं नहीं होने की वजह से ग़ैर हाज़िर हो जाती हैं.

डॉक्टर क्रिस्टोफ़र विलियम्स का कहना था कि जिस वातावरण में साफ़-सफ़ाई और स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है, उस वातावरण में अन्य विकास लक्ष्यों को हासिल करना असम्भव है.

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