22/02/2013

सीरिया में सभी पक्ष बेहद ग़ैरज़िम्मेदार

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सीरिया में हिंसा से भारी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं

सीरिया में हिंसा से भारी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं

सीरिया पर संयुक्त राष्ट्र के एक जाँच आयोग की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि सीरिया में सरकार समर्थक और सरकार विरोधी सभी पक्ष दिन ब दिन बहुत हिंसक होते जा रहे हैं जिससे मानवीय जीवन को ख़तरा बहुत बढ़ता जा रहा है.

रिपोर्ट में ऐसी हत्याओं का ब्यौरा दिया गया है जो सरकार समर्थक और सरकार विरोधी ताक़तों ने की हैं.

रिपोर्ट के अनुसार पूरे सीरिया में हत्या, प्रताड़ना, बलात्कार, अपहरण और अन्य ग़ैर-मानवीय गतिविधियाँ हो रही हैं जिनके लिए सरकार समर्थक और सरकार विरोधी ताक़तें ज़िम्मेदार हैं और ये गतिविधियाँ मानवता के ख़िलाफ़ अपराध की श्रेणी में भी आ सकती हैं.

इस जाँच आयोग ने ये भी पाया है कि सरकार विरोधी ताक़तों ने बहुत से इलाक़ों पर नियंत्रण कर लिया है और वहाँ हत्या, प्रताड़ना, मनमाने तरीक़े से गिरफ़्तारियाँ और अपहरण जैसे मामले हुए हैं जो युद्धापराध की श्रेणी में भी आ सकते हैं.

जाँच आयोग के एक सदस्य कार्ला डेल पोंटे का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, ख़ासतौर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ये सुनिश्चित करना होगा कि सीरिया में हो रहे युद्धापराधों की जानकारी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय तक ज़रूर पहुँचा दी जाए.

कार्ला डेल पोंटे का कहना था कि ये एक बहुत ही दहला देने वाली बात है कि सुरक्षा परिषद ऐसे मामलों में तुरंत कोई फ़ैसला नहीं करती जबकि ये फ़ैसले तुरंत होने चाहिए क्योंकि सीरिया में ऐसे अपराध लगातार हो रहे हैं और प्रभावतों और हताहतों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही है इसलिए बिना देरी के न्याय किए जाने की ज़रूरत है.

इस जाँच आयोग को सीरिया के भीतर जाँच-पड़ताल करने की इजाज़त नहीं दी गई इसलिए आयोग ने सीरिया के बाहर ही इंटरव्यू करके अपनी रिपोर्ट पेश की है.

 पाकिस्तान में चरमपंथी हमले के बाद तेज़ कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पाकिस्तान में एक घातक चरमपंथी हमले के बाद तेज़ और मज़बूत कार्रवाई का आहवान किया है.

बान की मून के प्रवक्ता ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि उस घटना की कड़ी भर्त्सना की है जिसमें एक बम विस्फोट के ज़रिए शिया हज़ारा समुदाय के कुछ लोगों को निशाना बनाया गया.

शिया हज़ारा भी मुसलमानों का एक समुदाय है जिसे अक्सर निशाना बनाया जाता है. बम विस्फोट के ज़रिए ये हमला दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान के क्वेटा शहर के एक व्यस्त बाज़ार में हुआ.

इस हमले में कम से कम 89 लोग मारे गए और 200 से ज़्यादा घायल हो गए.

महासचिव ने ध्यान दिलाया कि क्वेटा शहर में हाल के समय में ये दूसरा ऐसा हमला था. जनवरी में भी ऐसा ही हमला हुआ था.

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक – शिया हज़ारा समुदाय पर इस ताज़ा हमले के संदर्भ में महासचिव ने कहा कि ऐसे हमलों के जो लोग ज़िम्मेदार हैं उनके ख़िलाफ़ त्वरित और सख़्त कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

महासचिव ने पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधयों पर क़ाबू पाने और इस तरह के हमलों को रोकने के प्रयासों में पाकिस्तान सरकार को संयुक्त राष्ट्र के पूरे सहयोग और समर्थन का भरोसा दिलाया.

हारमोन को नुक़सान पहुँचाने वाले रसायनों की मौजूदगी पर चिंता

ख़तरनाक रसायन पानी में भी पाए गए हैं

वातावरण में मौजूद बहुत से रसायनों का स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखा गया है

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी यू एन ई पी (UNEP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यू एच ओ (WHO) की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि इंसानों और जानवरों के स्वास्थ्य पर ऐसे बहुत से सिंथेटिक रसायनों बुरा असर हो सकता है जिनका हारमोन प्रणाली पर असर के बारे में परीक्षण नहीं किया गया है.

इन दोनों संगठनों के एक संयुक्त अध्ययन के बाद तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से घरों में और औद्योगिक उत्पादों में एंडॉकरीन डिसरप्टिंग केमिकल्स – ईडीसी पाए जाते हैं जो इंसानों और जानवरों की हारमोन प्रणाली को नुक़सान पहुँचाते हैं.

रिपोर्ट में आहवान किया गया है कि इंसानों और जानवरों में कुछ ख़ास तरह की बीमारियों और इन रसायनों के बीच संबंध का ठोस पता लगाने के लिए अभी कुछ और शोध किए जाने की ज़रूरत है.

रिपोर्ट कहती है कि बेहतर परीक्षण प्रणाली और सम्पूर्ण जाँच-पड़ताल के ज़रिए भविष्य में इस तरह की बीमारियों के ख़तरे को कम करते हुए बहुत से लोगों का स्वास्थ्य बचाया जा सकता है.

शीला लोगान संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम में कार्यक्रम अधिकारी हैं. उनका कहना था कि स्वभाविक चुनौती ये है कि बड़ी संख्या में नए रसायन बाज़ार में आ रहे हैं लेकिन इंसानों और जानवरों पर उनके प्रभाव के बारे में क्या उनकी सटीक परीक्षण हो पा रहे हैं?

“चुनौती ये भी है कि लोग रसायनों के बोझ तले दबे नज़र आते हैं क्योंकि पूरी दुनिया और वातावरण में तरह-तरह के रसायनों की मात्रा लगातार बढ़ रही है. इसलिए इन रसायनों के असर और नुक़सान के बारे में नई परीक्षण प्रणाली और शोध की बहुत ज़रूरत है.”

संयुक्त राष्ट्र की ये रिपोर्ट इंसानों और जानवरों की हारमोन प्रणाली पर रसायनों के असर के बारे में अभी तक की ये सबसे विस्तृत रिपोर्ट है.

रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि हारमोन प्रणाली को प्रभावित करने वाले रसायनों और कुछ ख़ास तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के बीच कुछ संबंध अवश्य है.

इनमें युवा पुरुषों की प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करना, महिलाओं में छाती का कैंसर, पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर, बच्चों के नर्वस सिस्टम पर असर, बच्चों में ध्यान लगाने की कमी और बहुत ज़्यादा चंचलता, और थायरॉयड कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ शामिल हैं.

रिपोर्ट में जानवरों पर भी इन रसायनों के असर के बारे में गहरी चिंता जताई गई है.

भोजन की बर्बादी रोकने के अभियान के तहत ख़ास भोज

दुनिया भर में हर साल क़रीब एक अरब 30 करोड़ टन का भोजन बर्बाद हो जाता है जिसे बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने विशेष अभियान चलाया हुआ है.

इस अभियान के तहत कीनिया की राजधानी नैरोबी में सैकड़ों मंत्रियों और उच्चाधिकारियों ने कीनिया में ही उगाए गए ऐसे खाद्य पदार्थों का आनंद लिया जिन्हें ब्रिटेन के सुपरमार्केट अच्छी दिखावट नहीं होने की वजह से नकार देते हैं.

इस अवसर को ज़ीरो वेस्ट रिसेप्शन यानी 'बिना भोजन बर्बादी वाला भोज' नाम दिया गया.

भोजन की बर्बादी को रोकने के संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के इस अभियान को नाम दिया गया है – सोचें – खाएँ और बचाएँ जिसे इसी साल जनवरी में शुरू किया गया है.

इस अभियान में उपभोक्ताओं और खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदारों और रेस्तराओं को ऐसे उपाय करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जिनके ज़रिए वो भोजन की बर्बादी को रोकने में मदद कर सकें.

हर साल लगभग एक अरब तीस करोड़ टन खाना बर्बाद चला जाता है जिसमें धन की भारी हानि होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुक़सान होता है. इतना ही नहीं, इससे विश्व स्तर पर खाद्य प्रणाली पर भी भारी बोझ होता है जो पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रही है.

भोजन की बर्बादी रोकने से एक टिकाऊ भविष्य बनाने की भी उम्मीद की जा रही है.

नैरोबी में आयोजित इस विशेष भोज में कीनिया भर से इकट्ठा किए गए लगभग 1600 किलोग्राम ऐसे फलों और सब्ज़ियों का इस्तेमाल किया गया जिन्हें फेंक दिया गया था.

इन फलों और सब्ज़ियों की पैदावार ब्रिटेन जैसे देशों को निर्यात करने के लिए गई थी लेकिन देखने में आकर्षक नहीं होने की वजह से सुपरमार्केटों ने इन्हें ख़रीदने से इनकार कर दिया.

बहुत से सुपरमार्केटों ने सब्ज़ियों की कटाई होने के बाद सौदा रद्दा कर दिया जिससे भारी मात्रा में ये सब्ज़ियाँ फेंकनी पड़ीं और किसानों को भारी नुक़सान हुआ.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक अचीम स्टीनर का कहना था कि इतनी बड़ी मात्रा में भोजन की बर्बादी को कोई भी आर्थिक, पर्यावरण या नैतिक तर्क देकर सही नहीं ठहराया जा सकता, और भोजन की ये बर्बादी पूरी दुनिया में हो रही है.

उन्होंने कहा कि इस अभियान के ज़रिए हम उपभोक्ताओं, दुकानदारों और नीति निर्माताओं को ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो खाना भारी मात्रा में फेंक दिया जाता है वो ना सिर्फ़ खाने योग्य होता है बल्कि स्वादिष्ट और स्वास्थ्य के लिए अच्छी भी होता है.

मातृ भाषा को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस

मंगलवार, 21 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस मनाया गया है और इस वर्ष इस दिवस का मुख्य ध्यान भाषाओं और पुस्तकों के बीच संबंधों के बारे में ज़्यादा ग़ौर करना है.

बच्चियाँ किताब पढ़ते हुए

बहुत सी मातृ भाषाओं में पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं

यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बाकोवा ने कहा है कि कुछ देशों में स्थानीय भाषाओं में सामान्य पुस्तकों और पाठ्य पुस्तकों की कमी होने की वजह से विकास और सामाजिक समरसता में बाधा खड़ी होती है. और ये बाधा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है.

इरीना बोकोवा का कहना था कि ये सही है कि डिजिटल उपकरण कुछ हद तक किताबों की कमी को पूरा कर सकते हैं लेकिन ये उपकरण इंसानों की ज्ञान अर्जित करने की ज़रूरत पूरी करने के लिए काफ़ी नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा भाषाओं में पाठ्य सामग्री और पुस्तकें उपलब्ध कराने की ज़रूरत है और इनमें में बच्चों की मातृ भाषाओं में पुस्तकें उपलब्ध कराना बेहद ज़रूरी है.

अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस यूनेस्को ने 1999 में शुरू किया था जिसके ज़रिए भाषाई विविधता और अनेक भाषाओं में शिक्षा मुहैया कराने के प्रयासों को बढ़ावा दिया जाता है. इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवसे के ज़रिए मातृ भाषा की महत्ता के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जाता है.

 सोलर लाइटिंग प्रकाश का एक वैकल्पिक और टिकाऊ स्रोत

दुनिया के जिन इलाक़ों में बिजली उपलब्ध नहीं है वहाँ लोग कैरोसीन यानी मिट्टी के तेल से जलने वाले लालटेन, मोमबत्तियाँ और फ्लैशलाइट इस्तेमाल करने को मजबूर होते हैं.

परंपरागत ईंधन पर आधारित ये प्रकास स्रोत दुनिया भर के लगभग एक अरब इस्तेमाल करते हैं जिनके पास बिजली नहीं पहुँच पाती है.

भारत में भी भारी आबादी बिजली के बिना ही गुज़र-बसर करती है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम – यूएनईपी का कहना है कि सौर ऊर्जा यानी धूप से चार्ज होकर प्रकाश देने वाले बैटरी जैसे उपकरण उजाला देने की दिशा में बहुत कारगर साबित हो रहे हैं और पर्यावरण पर इनका प्रतिकूल असर भी नहीं पड़ता है.

इससे ना सिर्फ़ धन की बचत होती है बल्कि वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरों को भी कम किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने टिकाऊ और अक्षय ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल ऑफ़ ग्रिड लाइटिंग एसोसिएशन के साथ मिलकर काम करने की भी घोषणा की है.