15/11/2013

पोषण और स्वास्थ्य बढ़ाने का आहवान

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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन का कहना है कि हालाँकि दुनिया भर में पर्याप्त मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन होता है फिर भी क़रीब 84 करोड़ लोगों को भूखा रहना पड़ता है.

संगठन के मुखिया होज़े ग्रेज़ीयानो डी सिल्वा ने बेहतर पोषण के लिए खाद्य उत्पादन के तरीक़ों पर विचार करने के लिए रोम में तीन दिन की बैठक का उदघाटन करते हुए ये बात कही.

इस विचार गोष्ठि का आयोजन खाद्य और कृषि संगठन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर किया.

होज़े ग्रेज़ियानो डी सिल्वा ने कहा कि यह बहुत स्पष्ट है कि आज तक जिस तरीक़े से भोजन और खाद्य पदार्थों का प्रबन्धन किया जाता है उससे लोगों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार करने में नाकामी मिली है.

होज़े ग्रेज़ियानो का कहना था, “दुनिया भर की लगभग आधी आबादी किसी ना किसी रूप के कुपोषण का सामना कर रही है. इनमें क़रीब 84 लोगों को भरपेट खाना नहीं मिलता, बहुत से लोगों को पोषण के लिए ज़रूरी पदार्थ नहीं मिल पाते हैं जबकि बहुत से लोग ज़रूरत से ज़्यादा भोजन खाते हैं.”

“इसके साथ ही ये बहुत चिन्ता का विषय है कि दुनिया भर में जितने खाद्य पदार्थों का उत्पादन होता है, उसमें से क़रीब एक तिहाई बर्बाद चला जाता है. ये जितना भोजन तैयार तो हो जाता है लेकिन उसे खाया नहीं जाता, यानी व्यर्थ जाने वाले इस भोजन से क़रीब दो अरब लोगों का पेट भर सकता है.”

विशेषज्ञों की इस बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श के साथ-साथ नवम्बर 2014 में होने वाले पोषण पर दूसरे अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए आधार कार्य किया जाएगा.

इस सम्मेलन को ICN2 नाम दिया गया है जिसमें ख़ासतौर से विकासशील देशों में लोगों के खान-पान को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले कारकों में अन्तरराष्ट्रीय समन्वय को बढ़ावा देने के प्रयासों पर विचार किया जाएगा.

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