8/11/2013

ग्रीन हाउस गैसें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचीं

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विश्व मौसम संगठन यानी WMO ने ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा पिछले वर्ष बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है.

ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ने का ये सिलसिला लगातार जारी है जिसकी वजह से जलवायु परिवर्तन यानी Climate Change हो रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन की वजह से 1990 और 2012 के बीच वैश्विक तापमान में गर्मी के प्रभाव में 32 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है.

इनके अलावा गर्मी को सोखने वाली मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी अन्य गैसों की मात्रा में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

विश्व मौसम संगठन के महासचिव माइकल जर्राउड का कहना था कि ग्रीन हाउस गैसों का स्तर बढ़ने से पृथ्वी के तापमान और मौसम का मिज़ाज बदल रहा है, हिम पटल और ग्लेशियर पिघल रहे हैं और इस वजह से समुद्र में जल स्तर भी बढ़ रहा है.

माइकल जर्राउड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की रफ़्तार को अगर रोकना है तो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी और टिकाऊ कमी लानी होगी.

माइकल जर्राउड का कहना था, "नापतौल करने पर जो नतीजे हमारे सामने आ रहे हैं, उनसे पता चलता है कि हम घाटे में हैं. कार्बन डाई ऑक्साइड यानी CO2 एक स्थिर गैस है जिसका मतलब है कि कोई ऐसी रसायनिक प्रतिक्रिया नहीं होगी जिससे वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड नष्ट हो जाएगी या उसकी मात्रा कम हो जाएगी."

"इसलिए कार्बन डाई ऑक्साइड बहुत लम्बे समय तक मौजूद रहती है यानी सैकड़ों वर्ष या उससे भी ज़्यादा समय तक. इसलिए अभी हम कोई क़दम उठाते हैं या नहीं उठाते हैं, उसका लम्बी अवधि के परिणामों पर गहरा असर पड़ेगा."

ध्यान देने की बात है कि कार्बन डाई ऑक्साइड ऐसी सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण ग्रीन हाउस गैस है जिसका उत्सर्जन मानव गतिविधियों की वजह से होता है.

इनमें ज़हरीला धुँआ निकालने वाला ईंधन जलाना और जंगलों की कटाई करने जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं.

विश्व मौसम संगठन का कहना है कि अगर कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन तुरन्त रोक भी दिया जाता है तो जलवायु परिवर्तन के असर अनेक शताब्दियों तक मौजूद रहेंगे.

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