1/11/2013

कम उम्र में माँ बनने से कई नुक़सान

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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि हर वर्ष 18 वर्ष से कम उम्र की क़रीब 73 लाख लड़कियाँ माँ बन जाती हैं जिसकी वजह से माँ और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के लिए अनेक चुनौतियाँ पैदा हो जाती हैं.

इन 73 लाख में से भी क़रीब 20 लाख लड़कियाँ ऐसी होती हैं जिनकी उम्र 14 वर्ष या उससे भी कम होती है.

इन लड़कियों को लम्बी अवधि की स्वास्थ्य समस्याएँ हो जाती हैं जिसके सामाजिक कुपरिणाम भी होते हैं.

साथ ही कम उम्र में माँ बनने से इन लड़कियों की मौत होने का ख़तरा भी बढ़ जाता है. वर्ष 2013 की इस जनसंख्या रिपोर्ट को नाम दिया गया है – 'Motherhood in Childhood: Facing the Challenge of Adolescent Pregnancy'.

रिपोर्ट में कम उम्र में माँ बनने की चुनौतियों का सामना करने के लिए बहुत गहरी भावना और समर्पण से काम करने का आहवान किया गया है.

लड़कियों को शिक्षा हासिल करने के लिए स्कूलों में रखने के वास्ते ज़्यादा धन ख़र्च करने और बाल विवाह पर रोक लगाने का भी आहवान किया गया है.

साथ ही महिला और पुरुषों के बीच समानता बढ़ाने और उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के लिए सदियों से चले आ रहे रूढ़िवादी नज़रिए में बदलाव लाने पर भी ज़ोर दिया गया है.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि किशोर लड़कियों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की देखभाल बढ़ाने की ज़रूरत है.

साथ ही उन्हें ऐसे उपायों से भी अवगत कराया जाए जिससे वे बच्चे पैदा करने से बच सकें और अगर वो माँ बन भी जाती हैं तो उन्हें हर सम्भव सहायता मुहैया कराई जाए.

जिनेवा में जनसंख्या कोष की निदेशक ऐलाना आर्मिटेज का कहना था, "लड़कियों के कम उम्र में माँ बनने से सबसे बुरा असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उनके अधिकारों पर पड़ता है."

"अगर किसी लड़की को शिक्षा नहीं मिल पाती है तो उसे आगे चलकर कामकाज हासिल करने में मुश्किल होगी जिसका नतीजा ये होगा कि वो अपना, अपने बच्चों और अपने परिवार का अच्छा भविष्य नहीं बना पाएगी."

एलाना आर्मिटेज का कहना था, "अगर कोई 14 वर्ष या उससे भी कम उम्र में माँ बन जाती है तो ये स्पष्ट है कि उसके अनेक अधिकारों का उल्लंघन हो चुका होता है और उसका भविष्य भी पटरी से उतर चुका होता है. दुनिया भर में क़रीब 58 करोड़ किशोर उम्र की लड़कियाँ हैं इसलिए उनके स्वास्थ्य और भविष्य की चिन्ता करना बहुत ज़रूरी हो जाता है."

"इस वर्ष की विश्व जनसंख्या रिपोर्ट दिखाती है कि लड़कियों को अगर सशक्त बना दिया जाए, उनके अधिकारों की हिफ़ाज़त की जाए और उनके अच्छे भविष्य निर्माण के लिए समुचित धन निवेश किया जाए तो उनके भीतर मौजूद तमाम क्षमताओं और सम्भावनाओं को भरपूर तरीक़े से प्रोत्साहित किया जा सकता है."

रिपोर्ट में किशोर उम्र में माँ बनने वाली लड़कियों के मामलों को एक नए नज़रिए से देखने पर ख़ास ज़ोर दिया गया है.

साथ ही ये भी कहा गया है कि कम उम्र में लड़कियों के माँ बनने के लिए सिर्फ़ उनके व्यवहार पर ही ध्यान ना दिया जाए बल्कि उनके परिवारों, समुदायों और सरकारों के कार्यकलापों और बर्ताव पर भी नज़र डाली जाए.