15/02/2013

टिकाऊ विकास के लिए युवाओं के सहयोग का आहवान

सुनिए /
युवा सम्मेलन

युवाओं से टिकाऊ विकास में ठोस योगदान का आहवान किया गया है

विश्व भर के युवाओं से ऐसे उपायों पर गंभीरता से विचार करने का आहवान किया गया है कि वे पर्यावरण संरक्षण में किस तरह से ठोस योगदान कर सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यू एन ई पी (UNEP) के कार्यकारी निदेशक अचिम स्टीनर ने कीनिया की राजधानी नैरोबी में सोमवार को एक महत्वपूर्ण युवा सम्मेलन में ये आहवान किया.

अचिम स्टीनर ने कहा कि युवाओं को ये भरोसा क़ायम करने की दिशा में काम करना चाहिए कि एक बेहतर दुनिया का निर्माण संभव है और सात अरब लोगों की मौजूदगी की वजह से मानवता को नाकामी का कोई ख़तरा नहीं है.

अचिम स्टीनर का कहना है कि बात सिर्फ़ इतनी सी है कि हमें एक दूसरे के साथ कुछ अलग तरीक़े से जीना सीखना होगा.

“हमें ख़ुद से ये सवाल पूछना होगा कि अगर हम आने वाले दस-बीस-तीस वर्षों की बात करें तो हमें इस पृथ्वी पर किस तरह से साथ रहना होगा. ख़ासतौर से जब आपमें से हर व्यक्ति ऐसे स्थानों, व्यवसायों और अपने-अपने समुदायों में ऐसे मुक़ाम पर होंगे जहाँ आप हालात में बहुत विशेष योगदान कर सकते हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ये दिखाने की कोशिश करता है कि ये ज़रूरी नहीं है कि विकास के नाम पर पूरे पर्यावरण को तबाह कर दिया जाए और बहुत से लोगों को विस्थापित कर दिया जाए.

इस सम्मेलन में 100 से भी ज़्यादा देशों के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भोजन की बर्बादी रोकने और टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए इंटरनेट सोशल मीडिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर विचार किया.

 महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव रोकने पर बनी समिति का सत्र

महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव का ख़ात्मा करने के लिए बनी समिति ने जिनेवा में अपना सत्र शुरू करते हुए कहा कि हिंसा की वजह से बहुत सी लड़कियाँ स्कूल नहीं जा पाती हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय के एक पदाधिकारी जैकब शेंयर ने ये संदेश प्रस्तुत किया.

जैकब शेंयर ने समिति का ध्यान उस घटना की तरफ़ आकर्षित किया जिसमें पाकिस्तान में 2012 में किस तरह तालेबान ने एक 14 वर्षीय लड़की – मलाला के सिर और गर्दन में गोली मार दी थी.

जैकब के अनुसार मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इस मुद्दे पर समिति के रुख़ का ज़ोरदार समर्थन करते हुए मलाला पर हुए पाकिस्तानी तालेबान के हमले की कड़ी निंदा और भर्त्सना की.

वक्तव्य में कहा गया है कि मलाला पर सिर्फ़ इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो ना सिर्फ़ ख़ुद शिक्षा हासिल करना चाहती थीं बल्कि अन्य लड़कियों के शिक्षाधिकार के लिए भी अभियान चला रही थीं.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने ये भी कहा कि स्कूल के रास्ते में लड़कियों के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा की वजह से बहुत सी लड़कियाँ स्कूल जाना ही बंद कर देती हैं."

तीन सप्ताह तक चलने वाले विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों का ये सम्मेलन महिलाओं के ख़िलाफ़ भेदभाव को रोकने से संबंधित मुद्दों पर विचार विमर्श करने के लिए आयोजित किया गया.

महिलाओं के ख़िलाफ़ तमाम तरह के भेदभाव को रोकने के लिए की गई संधि के प्रावधान लागू करने संबंधी ब्यौरा भी पेश किया गया. ये संधि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर 1979 को स्वीकृत की थी. इस संधि को महिलाओं के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय क़ानून समझा जाता है.

 शिक्षा, विचारों और परिवर्तन में रेडियो की महत्ता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि क़रीब एक शताब्दी पहले ईजाद किए गए रेडियो ने कल्पना शक्ति को अदभुत तरीक़े से बढ़ाया है, परिवर्तन के दरवाज़े खोले हैं और जीवन दायिनी सूचना के एक चैनल के रूप में भी काम किया है.

रेडियो सुनती कुछ युवतियाँ

शिक्षा प्रसार और परिवर्तन लाने में रेडियो की अहम भूमिका रही है

13 फ़रवरी को विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर दिए एक संदेश में महासचिव ने रेडियो की रचनात्मक और सकारात्मक ताक़त का जश्न मनाए जाने का आहवान किया.

कोरियाई युद्ध के बाद के समय में एक ग़रीब गाँव में जब वो अपनी युवावस्था की दहलीज़ पर क़दम रख रहे थे तो वो रेडियो ही था जिसने विश्व का झरोखा उनके लिए खोला.

महासचिव बान की मून का कहना है, "रेडियो लोगों का मनोरंजन करता है, उन्हें शिक्षित करता है और ज्ञानवर्धन करता है. ये लोकतांत्रिक अभियक्ति को बढ़ावा देता है और विचारों को प्रभावित करता है.”

“शॉर्टवेव से लेकर एफ़म और सेटेलाइट तक, रेडियो लोगों को अपने ही स्थानों पर आपस में जोड़ता है. हिंसा और संकट के हालात में नाज़ुक दौर का सामना करने वाले समुदायों के लिए रेडियो जीवन रेखा का काम करता है. रेडियो एक बहुमूल्य उपकरण होने के साथ-साथ बहुत सस्ता भी होता है."

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पहले ही दिन से दुनिया भर में लोगों तक पहुँचने के लिए रेडियो का इस्तेमाल कर रहा है.

बान की मून के अनुसार संयुक्त राष्ट्र रेडियो इस विश्व संस्था के एजेंडा के तमाम पहलुओं और मुद्दों पर रौशनी डालता है जिनमें टिकाऊ विकास से लेकर बच्चों का संरक्षण, और शांति स्थापना से लेकर हिंसा और संघर्ष रोकने तक के मुद्दे शामिल हैं.

फ़लस्तीनी बंदियों के ख़राब स्वास्थ्य पर चिंता

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने उन फ़लस्तीनी बंदियों के स्वास्थ्य के बारे में चिंता जताई है जो इसराइली हिरासत में भूख हड़ताल पर हैं.

इसराइल ने ऐसे अनेक फ़लस्तीनी लोगों को बंदी बनाकर रखा है जिन पर ना तो औपचारिक रूप से आरोप निर्धारित किए गए हैं और ना ही उन पर मुक़दमा चलाया गया है. इसराइल ऐसी हिरासत को 'प्रशासनिक बंदीकरण' क़रार देता है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लै ने इसराइल की इस प्रशासनिक बंदीकरण प्रक्रिया पर अपनी चिंता दोहराते हुए कहा कि इन बंदियों पर या तो आरोप निर्धारित करते हुए मुक़दमा चलाया जाए या फिर इन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाए.

संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता एडुअर्डो डेल बुए ने कहा कि एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने इस मुद्दे पर बुधवार को एक वरिष्ठ फ़लस्तीनी अधिकारी से बातचीत की है.

एडुअर्डो डेल का कहना था कि अधिकृत फ़लस्तीनी इलाक़ों में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के संयोजक जेम्स रवली ने फ़लस्तीनी जेल और बंदी मामलों के मंत्री ईसा क़रागे के साथ रामल्ला में मुलाक़ात की है और इसराइली हिरासत में फ़लस्तीनी बंदियों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की लगातार चिंता से अवगत कराया.

“दोनों हस्तियों ने उन चार फ़लस्तीनी बंदियों की हालत पर भी बातचीत की जो भूख हड़ताल कर रहे हैं, ख़ासतौर से उनके स्वास्थ्य के बारे में गंभीर बातचीत की गई. इनमें से एक फ़लस्तीनी बंदी तो 200 दिनों से भूख हड़ताल पर है."

उन्होंने ये भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पदाधिकारियों ने महासचिव के इस रुख़ को भी दोहराया कि जिन फ़लस्तीनियों को बंदी बनाकर रखा गया है उन पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार आरोप निर्धारित करके बिना किसी देरी के मुक़दमा चलाया जाए.

 खाद्य और पोषण को विकास लक्ष्य बनाने पर ज़ोर

खाद्य और कृषि संगठन यानी एफ़ ए ओ (FAO) ने कहा है कि भविष्य में विकास के लिए किए जाने वाले तमाम प्रयासों में खाद्य सुरक्षा और पोषण पर सबसे ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है.

वर्ष 2015 से आगे के लिए विश्व विकास एजेंडा पर रोम में विचार विमर्श करने वाले पैनल में ये बात उभरकर सामने आई कि नए विकास लक्ष्य सम्पूर्ण वैश्विक समुदाय के लिए होने चाहिए.

वर्ष 2015 से आगे के विकास एजेंडा में खाद्य सुरक्षा और पोषण पर आयोजित एक दिन की संगोष्ठि में ज़ोर दिया गया कि रोज़गार, शिक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और पूरी मानवजाति के लिए एक अच्छा भविष्य सुनिश्चित करने के विकास मोर्चों में खाद्य सुरक्षा और पोषण बहुत महत्वपूर्ण मुक़ाम रखते हैं.

एफ़ ए ओ के महानिदेशक होज़े ग्रैज़ियानो डी सिल्वा ने इस संगोष्ठि का उदघाटन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आहवान किया कि 2015 से आगे के लिए विकास लक्ष्यों की प्राथमिकता निर्धारित करते समय भोजन की क़िल्लत को पूरी तरह दूर करने के लिए पक्का संकल्प दिखाना होगा.

उन्होंने कहा कि "संयुक्त राष्ट्र महासचिव की महान भूख चुनौती की तर्ज़ पर बात करते हुए और विकास भागीदारों के साथ एकजुटता दिखाते हुए भूख की स्थिति का सामना करने, खाद्य असुरक्षा दूर करने और कुपोषण का सामना करने क के लिए जद्दोजहद करनी होगी."

संगोष्ठि में इस पर भी ज़ोर दिया गया कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों में खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने और ग़रीबी उन्मूलन के प्रयासों में तालमेल बिठाना होगा.

इसके अलावा नए विकास लक्ष्य सिर्फ़ विकासशील देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए होने चाहिए.

युवाओं के लिए विशेष दूत ने पंद संभाला

अहमद अलहन्दावी और बान की मून

अहमद अलहन्दावी का चयन गहन प्रकिया के ज़रिए किया गया है

युवा मामलों के लिए महासचिव के नवनियुक्त विशेष दूत अहमद अलहन्दावी ने शुक्रवार को अपना पद संभाल लिया है.

29 वर्षीय अहमद का संबंध जॉर्डन से है और उनके बारे में कहा गया है कि वो ना सिर्फ़ युवाओं से संबंधित मुद्दों की गहरी जानकारी रखते हैं बल्कि उन्होंने इस क्षेत्र में स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी काम किया है.

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता मार्टिन नैसर्की ने कहा कि अहमद अलहन्दावी का चयन एक गहन प्रक्रिया के ज़रिए किया गया है.

मार्टिन नैसर्की का कहना था कि अहमद अलहन्दावी के शपथ ग्रहण समारोह में महासचिव ने कहा कि हम जो भी कुछ युवाओं के लिए करेंगे वो टिकाऊ विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा. इसमें युवाओं को समान अवसर मुहैया कराने और अच्छे दर्जे का कामकाज मुहैया कराने में मदद करना भी शामिल होगा.

“महासचिव ने अहमद अलहन्दावी को अरबों युवाओं में एक बहुत ही ख़ास युवा नेता क़रार दिया. उन्होंने ये भी कहा कि ये युवा नेता नए और रचनात्मक विचारों के साथ युवाओं के लिए काम करेगा."

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता मार्टिन नैसर्की के शब्द. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने पंच वर्षीय एक्शन एजेंडा में महिलाओं और युवाओं के लिए और उनके साथ मिलकर काम करने को अति महत्वपूर्ण क़रार दिया.