1/11/2013

अमरीका से क्यूबा की नाकेबन्दी ख़त्म करने की पुकार

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193 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मंगलवार को अमरीका से अपनी ये पुकार फिर दोहराई कि वो क़रीब आधी शताब्दी से चली आ रही क्यूबा की नाकेबन्दी ख़त्म कर दे.

ग़ौरतलब है कि अमरीका ने 1960 से क्यूबा का ना सिर्फ़ बहिष्कार कर रखा है और प्रतिबन्ध लगा रखे हैं, बल्कि उसकी नाकेबन्दी कर रखी है.

इस प्रस्ताव के समर्थन में 188 सदस्यों ने मतदान किया जबकि अमरीका और इसराइल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया. तीन देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

क्यूबा का कहना है कि अमरीका ने जो उसकी नाकेबन्दी कर रखी है उसकी वजह से क्यूबा को दस खरब, 126 अरब डॉलर से भी ज़्यादा का नुक़सान हो चुका है.

संयुक्त राष्ट्र में इथियोपिया के उप प्रतिनिधि राजदूत अमान हसन ने अफ्रीकी समूह के देशों की तरफ़ से विचार रखते हुए कहा कि अफ्रीका इस प्रस्ताव का पूरी तरह समर्थन करता है कि क्यूबा के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबन्धों को तुरन्त हटाए जाने की सख़्त ज़रूरत है.

उनका कहना था, "क्यूबा के ख़िलाफ प्रतिबन्ध इसलिए हटाए जाने चाहिए क्योंकि सबसे पहली बात तो ये कि ऐसा करना सही होगा. ऐसा इसलिए भी किया जाना चाहिए क्योंकि अफ्रिका में क्यूबा का एक सम्मानजनक और गौर्वान्वित इतिहास रहा है और क्यूबा ने अफ्रीका में आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है."

"इस भूमिका को अफ्रीका के लोग हमेशा याद करेंगे. साथ ही क्यूबा के लोगों को अपने देश के ऐतिहासिक योगदान के लिए गर्व महसूस करना चाहिए."

प्रस्ताव पर विचार व्यक्त करने वाले अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने इस पर गम्भीर चिन्ता जताई कि अमरीका ने 1996 के बाद से हेल्म्स-बर्टन एक्ट का दायरा उन देशों तक भी बढ़ा दिया है जो क्यूबा के साथ कारोबार करते हैं जिससे व्यापक हित प्रभावित हो रहे हैं.

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