25/10/2013

एक बेहतर दुनिया का सपना साकार करने का संकल्प

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"संयुक्त राष्ट्र दिवस हम सबको एक बार फिर समझने और समझाने का मौक़ा उपलब्ध कराता है कि ये संगठन विश्व में शान्ति और विकास के लिए कितना योगदान करता है."

ये कहना है संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून का जिन्होंने 24 अक्तूबर को संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर ये बयान दिया. साथ ही उन्होंन ये भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर हमें ये भी ग़ौर करना चाहिए कि इस दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने के लिए हम सब क्या कुछ और बेहतर कर सकते हैं.

महासचिव बान की मून ने सीरिया में हो रही भीषण लड़ाई को संयुक्त राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती क़रार दिया. उन्होंने ये भी कहा कि इस विश्व संगठन के सामने सबसे बड़ी विकास चुनौती है कि टिकाउ विकास को वास्तविकता कैसे बनाया जाए.

महासचिव बान की मून ने कहा कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों का जीवन संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता पहुँचाने वाले कर्मचारियों और स्वयंसेवकों पर निर्भर करता है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने जो सहस्राब्दि विकास लक्ष्य यानी एम डी जी निर्धारित किए थे उन्हें हासिल करने के प्रयासों की बदौलत दुनिया भर में ग़रीबी में आधी कमी आई है. इसलिए हमें इस कामयाबी की रफ़्तार बरक़रार रखनी होगी.

साथ ही 2015 के बाद के वर्षों के लिए भी इसी तरह के उत्साहजनक और प्रेरणादायक लक्ष्य निर्धारित करने होंगे जिनमें विकास एजेंडा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना किया जा सके.

महासचिव ने कहा कि इस वर्ष भी हमने एक बार फिर देखा कि सशस्त्र संघर्ष, मानवाधिकार, पर्यावरण और अन्य अनेक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र में एकजुटता नज़र आई. हमें ये एक जुटता ना सिर्फ़ असल में बनाए रखनी होगी बल्कि ये भी दिखाना होगा कि हम बेहतर कामयाबी हासिल कर सकते हैं.

बान की मून ने कहा कि अब बहुत ज़्यादा आपस में जुड़ चुकी दुनिया में हमें और भी ज़्यादा एकजुटता दिखानी होगी.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर हम सभी को संगठन के स्थापना आदर्शों पर खरा उतरने का संकल्प दोहराना होगा, साथ ही शान्ति, विकास और मानवाधिकारों की ख़ातिर एक साथ मिलकर काम करना होगा.

उधर संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में एक समारोह आयोजित किया गया जिसे नाम दिया गया – Peace Maker in Need of a Pacemaker यानी क्या शान्ति स्थापित करने वाली संस्था को ख़ुद जीवित रहने के लिए सहारे की ज़रूरत है.

इस समारोह में भारत सरकार के एक मंत्री डॉक्टर शशि थरूर ने भी हिस्सा लिया. शशि थरूर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसे मंच के रूप में काम करता रहेगा जहाँ अमीर-ग़रीब व विकसित और विकासशील देश इकट्ठा होकर अपनी बात कहते रहेंगे.

ये एक ऐसा मंच बना रहेगा जहाँ कमज़ोर की आवाज़ को भी उतना ही वज़न मिलता है जितना चिंघाड़ने वाले की आवाज़ को. दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर 21 अक्तूबर को आयोजित इस समारोह में मुख्य विषय इस विश्व संस्था की प्रासंगिकता पर उठ रही चिन्ताओं के मद्देनज़र रखा गया.

भारत और भूटान के लिए नई दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र की निदेशक किरन मेहरा करपलमैन ने डॉक्टर शशि थरूर को संयुक्त राष्ट्र के वजूद और आदर्शों में सच्ची आस्था रखने वाला एक ऐसा राजनयिक क़रार दिया जिसने शान्ति, विकास और मानवाधिकार मुद्दों को हमेशा ही अहमियत दी है.

शशि थरूर ने कहा कि निश्चित रूप से संयुक्त राष्ट्र में कुछ जान फूँकने की सख़्त ज़रूरत है लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि संगठन की जान सुरक्षा परिषद में बसती है.

उन्होंने एक ऐसे संयुक्त राष्ट्र संगठन की कल्पना करने में कोई झिझक नहीं दिखाई जिसमें कुछ फेरबदल हों लेकिन उनकी बुनियाद पिछले साठ साल में हासिल की गई कामयाबियों पर रखी हो और संस्था के नए रूप में उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए रचनाशीलता और नई सोच भी शामिल हो.

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