18/10/2013

वायुमंडल में कैंसर के तत्व अति सक्रिय

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कैंसर पर शोध करने वाली अन्तरराष्ट्रीय एजेंसी आईएआरसी की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस हवा में हम साँस लेते हैं वो ऐसे तत्वों से प्रदूषित हो गई है जिससे कैंसर होने का ख़तरा बहुत होता है.

एजेंसी का कहना है कि हालाँकि वैसे तो वायु प्रदूषण पहले ही साँस और हृदय रोगों को जन्म देने वाले कारकों के लिए जाना जाता है लेकिन हाल के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर और ब्लेडर कैंसर होने का ख़तरा बहुत होता है.

एजेंसी के अनुसार वर्ष 2010 में दुनिया भर में वायु प्रदूषण से हुए कैंसर से क़रीब 2 लाख 23 हज़ार लोगों की मौत हुई.

विश्व स्वास्थ्य से सम्बद्ध एजेंसी आई ए आर सी का कहना है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में वायु प्रदूषण में रहने वाले लोगों की संख्या में चिनताजनक रूप में बढ़ोत्तरी हो रही है, ख़ासतौर से ऐसे देशों में जहाँ औद्योगीकरण तेज़ी से हो रहा है और वहाँ आबादी भी ज़्यादा है.

आई ए आर सी के डॉक्टर डैना लूमिस का कहना था, "एशिया और दक्षिण अमरीका में मध्य आय वाले ऐसे बहुत से देश हैं जहाँ बहुत तेज़ी से औद्योगीकरण हो रहा है जिस पर ध्यान दिया जाना बहुत ज़रूरी है."

"चीन में तो एक बड़ी आबादी वायु प्रदूषण में रहने की आदी हो गई है. हालाँकि चीन सरकार ने अपने यहाँ वायु प्रदूषण कम करने के लिए क़दम उठाए हैं लेकिन वायुमंडल की गुणवत्ता सुधारने के लिए वो काफ़ी नहीं हैं. पूरी दुनिया में तेज़ी से औद्योगीकरण करने वाले देशों में ये एक आम समस्या है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक गम्भीर चुनौती बन चुकी है."

उन्होंने कहा, "ये ध्यान रखने की बाद है कि हवा पर सभी का बराबर हक़ है. हवा पर किसी का भी कोई निजी या एकाधिकार नहीं है और हवा ख़राब होने के लिए हम सभी बराबर ज़िम्मेदार भी हैं. इसलिए हमें ये ध्यान रखना होगा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की इस समस्या का सामना करने के लिए एकजुट प्रयासों की ज़रूरत है."

एजेंसी का अनुमान है कि अगले बीस वर्षों में कैंसर होने वाले लोगों की संख्या दोगुनी होकर क़रीब ढाई करोड़ हो जाएगी जिनमें से ज़्यादातर मामले विकासशील देशों में होंगे.

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