18/10/2013

2015 तक 25 करोड़ का टीकाकरण

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विकासशील देशों में तरह-तरह की बीमारियों से बचाने के लिए वर्ष 2015 तक क़रीब 25 करोड़ बच्चों में टीके लगाने और दवाइयों की ख़ुराकें देने का लक्ष्य रखा गया है.

जी ए वी आई – गावी अलायंस नामक संगठन का कहना है कि ये टीकाकरण करके बच्चों में होने वाली लगभग चालीस लाख मौतों को रोका जा सकेगा.

टीकाकरण के इस कार्यक्रम पर क़रीब साढ़े सात अरब डॉलर की लागत आएगी. जीएवीआई-गावी अलायंस संगठन का कहना है कि चार साल तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत निम्न और उच्च आय वाले देशों में बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में मौजूद ऐतिहासिक अन्तर की भरपाई के लिए भी क़दम उठाए जाएंगे.

संगठन ने हालाँकि ये भी ध्यान दिलाया कि दुनिया में अब भी बहुत से इलाक़े ऐसे हैं जहाँ बच्चों को ज़रूरी दवाएँ दिया जाना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती है.

लेकिन बीमारियों से बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए तमाम सरकारों और समुदायों के साथ मिलकर ठोस क़दम उठाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है.

जीएवीआई अलायंस के CEO यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर सेठ बर्कली का कहना था, "भारत, नाईजीरिया और इथियोपिया में लगभग सवा दो करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिन्हें नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों का लाभ नहीं मिल पा रहा है."

"बच्चों के टीके और बचपन में दी जाने वाली दवाएँ की लागत उनके लाभ के मुक़ाबले बहुत कम है. मेरा ख़याल है कि पूरी दुनिया में हर बच्चे को बचपन में ही ज़रूरी दवाएँ पिला देनी चाहिए और उनका टीकाकरण कर दिया जाना चाहिए."

उनका कहना है, "अगर आज हम ये सवाल पूछते हैं कि कितने बच्चों को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वीकृत 11 दवाइयाँ पिला दी गई हैं तो सिर्फ़ 11 प्रतिशत बच्चों को इन सभी 11 दवाइयों ख़ुराकें मिल पाती हैं. हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस अभियान की अवधि के दौरान सभी बच्चों को ये ज़रूरी 11 दवाएँ मिल पाएंगी ताकि उन्हें बीमारियों से बचाया जा सके. "इससे वो बच्चे अपने जीवन में सीखने की भरपूर क्षमता का इस्तेमाल कर सकेंगे और समाजों में अपना भरपूर रचनात्मक योगदान भी कर सकेंगे."

ये संगठन इस समय कम से कम 73 देशों में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को सहायता मुहैया करा रहा है.