4/10/2013

करोड़ों लोग अब भी कुपोषित

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संयुक्त राष्ट्र की तीन एजेंसियों ने कहा है कि दुनिया भर में वैसे तो भूखे पेट रहने वाले लोगों की संख्या में काफ़ी कमी आई है लेकिन अब भी करोड़ों लोग ऐसे हैं जो ख़राब स्वास्थ्य यानी कुपोषण के शिकार हैं.

इन एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान पाया गया है कि क़रीब 84 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें भोजन तो मिलता है लेकिन वो उतना नहीं है जिससे स्वास्थ्य ठीक रह सके.

यानी हर आठ में से एक व्यक्ति ऐसा है जो समुचित भोजन नहीं मिल पाने की वजह से सक्रिय और स्वस्थ जीवन नहीं व्यतीत कर पा रहा है.

वर्ष 2010 से 2012 के दौरान ऐसे लोगों की संख्या 87 करोड़ थी. ये रिपोर्ट खाद्य और कृषि संगठन यानी FAO, अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष यानी IFAD और विश्व खाद्य कार्यक्रम यानी WFP ने मिलकर तैयार की है.

पीयरो कनफ़ोर्ती खाद्य और कृषि संगठन के साथ आर्थिक विशेषज्ञ के तौर पर काम करते हैं. उनका कहना है, "हम समझते हैं कि आर्थिक विकास, आर्थिक अवसर और ख़ासतौर से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता में बढ़ोत्तरी जैसी गतिविधियों से भुखमरी के मामलों में कमी आ सकती है. लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि सिर्फ़ आर्थिक प्रगति ही काफ़ी नहीं है."

"ठोस कामयाबी तभी मिल सकती है जब तमाम सरकारें अन्य प्रभावशाली संगठनों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करें, जिससे समाज में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि हमें इस मुद्दे को बहुत महत्वपूर्ण मानते हुए अपने प्रयास जारी रखने होंगे."

एफ़ ए ओ ने तमाम देशों की सरकारों से सिफ़ारिश की है कि वे ऐसी नीतियाँ  बनाएँ जिससे ख़ासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ग़रीबों का भला हो सके. नीतियाँ ऐसी होनी चाहिए जिनसे लोगों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और धन निवेश का माहौल भी बढ़ाया जा सके.

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