4/10/2013

लीबिया की जेलों में प्रताड़ना के आरोप

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संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि लीबिया की जेलों में लगभग आठ हज़ार लोगों को बन्दी बनाकर रखा गया है जिन्हें ना तो परिजनों से मिलने का मौक़ा दिया जाता है और ना ही क़ानूनी सहायता दी जा रही है.

ये रिपोर्ट लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के मिशन और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय ने मिलकर तैयार की है.

रिपोर्ट कहती है कि इन जेलों में रखे गए बन्दियों को अक्सर प्रताड़ित किया जाता है और उनके साथ अन्य तरीक़ों से अमानवीय बर्ताय किया जाता है.

इन लोगों को 2011 के गृहयुद्ध के बाद वजूद में आए सशस्त्र गुटों के बन्दीगृहों में रखा गया है जहाँ उनसे इक़बालिया बयान दिलवाने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया जाता है.

इन बन्दियों को उनके घरों, कामकाज के स्थानों, सड़कों, सुरक्षा नाकों वग़ैरा से गिरफ़्तार किया गया है.

उन पर सिर्फ़ ये शक है कि वो कर्नल मुअम्मार ग़द्दाफ़ी की सरकार के आदमी रहे हैं. हालाँकि ये शक ज़्यादातर उनके क़बायली या जातीय मूल के आधार पर है.

संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं से बातचीत करने वाले बन्दियों ने बताया कि उन्हें कौड़ों, तारों और लोहे की छड़ों से पीटा जाता, बिजली के झटके दिए जाते हैं, पैर बाँधकर उल्टा लटकाया जाता है, सिगरेट और गर्म तरल पदार्थों से जलाया जाता है, और अक्सर लम्बे समय तक खाना-पानी नहीं दिया जाता.

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी जारी की है कि अगर इस बारे में जल्दी ही कुछ ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो लीबिया में इस तरह की प्रताड़ना एक आम बात बन जाएगी जिसे स्वीकार करना लोगों की मजबूरी बन जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रवीना शम्सादानी का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से 27 लोगों की इस तरह की जेलों में ही मौत हो गई है, इस बारें में सम्पूर्ण जानकारी हासिल हुई है कि इन क़ैदियों की मौत की वजह ख़तरनाक प्रताड़ना थी, "कुछ मामलों में तो सशस्त्र ब्रिगेड्स ने खुलेआम स्वीकार किया कि बन्दियों को प्रताड़ित किया जाता है, इतना ही नहीं, उन्होंने इस प्रताड़ना को सही ठहनाने की भी कोशिश की."

"संयुक्त राष्ट्र की ये ज़ोरदार सिफ़ारिश है कि लीबियाई अधिकारी और सशस्त्र ब्रिगेड्स इन बन्दियों को सरकार को सौंपने की प्रक्रिया ना सिर्फ़ तेज़ करें बल्कि जल्दी ही पूरा भी करें. इस बीच तमाम बन्दियों की सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए जाएँ ताकि उऩ्हें प्रताड़ना और अमानवीय बर्ताव से बचाया जा सके."

उन्होंने कहा कि "संयुक्त राष्ट्र ये भी सिफ़ारिश करता है कि लीबियाई सरकार इन बन्दियों के मामलों की समीक्षा करें ताकि निर्दोष बन्दियों को रहा किया जा सके. बाक़ी क़ैदियों को भी क़ानूनी सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए. लीबिया सरकार को बन्दियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि उनके साथ अमानवीय बर्ताव करने वाले लोग क़ानून के दायरे से बाहर ना रह सकें."

लीबिया में इस वर्ष, अप्रैल में एक क़ानून लागू किया गया था जिसमें प्रताड़ना, लोगों को अगवा करके लापता क़रार देना या भेदभाव को अपराध क़रार दिया गया था.

इस तरह के अपराध करने वालों के लिए पाँच वर्ष से उम्र क़ैद तक की सज़ा का भी प्रावधान किया गया है.