27/09/2013

युद्ध में यौन हिंसा के विरोध का संकल्प

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113 देशों ने हिंसक संघर्ष या युद्ध के दौरान यौन हिंसा और बलात्कार पर रोक लगाने के लिए एक नए संकल्प घोषणापत्र को मंज़ूरी दी है.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के अवसर पर ये घोषणा पत्र जारी किया गया है.

इसमें यौन हिंसा या बलात्कार को युद्ध के एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए वास्तविक और राजनीतिक संकल्पों और उपायों का ज़िक्र किया गया है.

देशों को इस घोषणा पत्र पर अपनी मंज़ूरी देने के लिए चार अक्तूबर तक का समय दिया गया है.

लड़ाई के दौरान यौन हिंसा के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि ज़ैनब बन्गूरा का कहना था…

"आज इस बैठक में आपकी मौजूदगी से उन तमाम कमज़ोर असहाय लोगों को सन्देश जाता है जो दुनिया भर में मदद की आस लगाए रहते हैं. उनके अन्दर ये उम्मीद भरी है कि अगर किसी युद्धस्थल में राजनीतिक या सैनिक फ़ायदे के लिए उनके शरीरों का इस्तेमाल किया जाता है तो अन्तरराष्ट्रीय समुदाय ख़ामोश खड़ा होकर ये अत्याचर नहीं देखेगा बल्कि उन असहायों की मदद करेगा."

"अब वो समय गया जब हिंसक संघर्ष या युद्ध के दौरान यौन हिंसा या बलात्कार को सिर्फ़ युद्ध का तक़ाज़ा कहकर इसकी गम्भीरता को टाल दिया जाता था. अब समय बदल चुका है इसलिए यौन हिंसा और बलात्कार के अपराधों को दबाने वालों को ऐसा करने से रोकने के लिए हमें ठोस कार्रवाई करनी होगी."

लड़ाई के दौरान यौन हिंसा के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि ज़ैनब बन्गूरा के शब्द. इस मुद्दे पर और जागरूकता बढ़ाने और कार्रवाई तेज़ करने के इरादे से अगले वर्ष ब्रिटेन में एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.

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