20/09/2013

गुरू, किताब, क़लम हैं असली ताक़त

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गुरू, किताब और एक क़लम, ये सब मिलकर दुनिया को बदलने की क़ुव्वत रखते हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफ़ज़ई के ये शब्द अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस समारोह के दौरान बोले.

मलाला यूसुफ़ज़ई वही लड़की है जो पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के लिए अभियान चला रही थी और उसे कथित तौर पर तालिबान ने गोली मार दी थी.

हालाँकि मलाला यूसुफ़ज़ई जीवित बच गई और ब्रिटेन में इलाज के बाद वो स्वस्थ भी हो गई.

अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस के समारोह बुधवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में शान्ति घंटाल बजाकर शुरू किए गए.

अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस 21 सितम्बर को मनाया जाता है जिसके ज़रिए अहिंसा में मानव जाति का भरोसा बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर लड़ाइयों को रोकने पर ज़ोर दिया जाता है.

महासचिव बान की मून ने कहा, शान्ति और अहिंसा की शायद जितनी ज़रूरत फिलहाल सीरिया में है, उतनी कहीं और नहीं है, क्योंकि सीरिया में मौत का तांडव लगभग ढाई साल से जारी है और लोगों की तकलीफ़ें अब बर्दाश्त के बाहर जाने लगी हैं.

महासचिव बान की मून का कहना था, "इस वर्ष के अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस की मुख्य थीम है – शान्ति के लिए शिक्षा."

"जब इस वर्ष जुलाई में मलाला यूसुफ़ज़ई संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर आई थीं तो उन्होंने कहा था: एक गुरू, एक पुस्तक और एक क़लम दुनिया को बदलने की ताक़त रखते हैं. ये हमारे सबसे ताक़तवर और मज़बूत औज़ार हैं. इसीलिए हमने पिछले वर्ष ग्लोबल एजूकेशन फ़र्स्ट इनीशिएटिव शुरू किया था."

महासचिव बान की मून का ये भी कहना था कि प्रत्येक लड़की और हर एक इन्सान को अच्छी शिक्षा हासिल करने का अधिकार है.

सभी को ऐसे मूल्य सीखने का भी अधिकार है जिनकी मदद से वो विश्व नागरिक बन सकें जहाँ वो एक सहिष्णु समाज का हिस्सा बनकर विविधता का आनन्द उठा सकें.

इस वर्ष के अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस के अवसर पर महासचिव बान की मून ने सभी का आहवान किया कि वो नई पीढ़ी को ऐसे मूल्य सिखाएँ जिनके ज़रिए सहनशीलता और आपसी सम्मान को बढ़ावा मिल सके.