13/09/2013

छोटे बाज़ार जान फूंकने में सक्षम

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संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन यानी अंकटाड की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक वित्तीय संकट को शुरू हुए पाँच वर्ष गुज़र चुके हैं लेकिन विश्व अर्थव्यवस्था अब भी संकट से उबर नहीं सकी है.

अंकटाड ने वार्षिक व्यापार और विकास रिपोर्ट में कहा है कि धनी देशों को वित्तीय संकट के कारणों को समझने और समस्या का ठोस हल निकालने के लिए मुस्तैदी से काम करना होगा.

ख़ासतौर से लोगों की आमदनी में जो भारी अन्तर है, उसे दूर करना होगा, सरकारों की आर्थिक भूमिका को फिर से मज़बूत करना होगा और कमज़ोर नियम-क़ानूनों के घेरे में आ चुके वित्तीय क्षेत्र की भूमिका बढ़ानी होगी.

अंकटाड के महासचिव डॉक्टर मुखीसा किटुई का कहना था कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं वाले ऐसे देशों को अपनी विकास रणनीति बदलनी होगी जो आर्थिक वृद्धि के लिए निर्यात पर निर्भर हैं, ऐसे देशों को घरेलू और क्षेत्रीय माँग पर ध्यान देते हुए अपनी नीतियों में बदलाव करने होंगे.

डॉक्टर मुखीसा किटुई का कहना था, "अमरीका में आर्थिक गतिविधियों की धीमी रफ़्तार और यूरोप में आर्थिक संकुचन की वजह से निर्यात पर आधारित आर्थिक हालात बहुत निराशाजनक बने हुए हैं. अभी तक निर्यात आधारित आर्थिक वृद्धि पर ज़ोर दिया जाता रहा है लेकिन अब घरेलू और क्षेत्रीय बाज़ारों की माँग पर ध्यान देना होगा."

"विकासशील और छोटी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के लिए ये संदेश अहम है कि उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक एकजुटता दिखानी होगी."

अंकटाड का कहना है कि वैश्विक आर्थिक प्रगति में इस वर्ष तो कोई ठोस सुधार अपेक्षित नहीं है. बल्कि पिछले वर्ष के मुक़ाबले इसमें कुछ गिरावट की ही आशंका जताई गई है.