6/09/2013

अभी अरबों लोग इंटरनेट से दूर

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संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वुक जेरेमिक ने कहा है कि विकासशील देशों में हालाँकि इंटरनेट तक आम लोगों की पहुँच लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन अब भी अरबों लोग ऐसे हैं जो इंटरनेट के फ़ायदों से वंचित हैं और उनके पास इंटरनेट कनेक्शन मौजूद नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के लिए अज़रबैजान के स्थायी मिशन ने बुधवार को एक संगोष्ठि का आयोजन किया जिसका विषय था – यूरोएशिया में इंटरनेट सम्पर्क को सुधारना. इस संगोष्ठि में अपने विचार रखते हुए महासभा के अध्यक्ष वुक जेरेमिक ने कहा कि विकासशील देशों में क़रीब 20 प्रतिशत घरों में इंटरनेट पहुँच चुका है.

कुछ वर्ष पहले तक सिर्फ़ 13 प्रतिशत घरों में ये सुविधा पहुँच सकी थी. वुक येरेमिक का कहना था, "ये एक बड़ी उपलब्धि है लेकिन इस क्षेत्र में अभी बहुत करने की ज़रूरत है."

"विकसित यानी धनी देशों में डिजिटल क्षेत्र में जो प्रगति हुई है उस रफ़्तार को विकासशील देशों में भी लाना बहुत ज़रूरी है. विकसित यानी धनी देशों में क़रीब 78 प्रतिशत घरों में इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध हो चुके हैं. इनमें से बहुत से घरों में सस्ता और भरोसेमन्द ब्रॉडबैन्ड इंटरनेट कनेक्शन मौजूद है."

वुक येरेमिक का कहना था कि "इसका साफ़ मतलब है कि दुनिया भर में अब भी अरबों लोग ऐसे हैं जो इंटरनेट के फ़ायदों से वंचित हैं और वो शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति के सस्ते और टिकाऊ तरीक़े से महरूम हैं. इसमें कोई शक नहीं है कि इंटरनेट से लोगों के जीवन में सुधार आता है.”

“इंटरनेट से वंचित रहने वाले लोगों में ज़्यादातर ऐसे हैं जो 21वीं सदी के डिजिटल समाज का हिस्सा नहीं बन सके हैं और इनमें ज़्यादातर लोग ग़रीब हैं."

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वुक जेरेमिक ने आगाह किया कि अमीर और ग़रीब के बीच खाई का दायरा बढ़ता ही जा रहा है.

पिछले क़रीब बीस वर्षों के दौरान ज़्यादा और कम आमदनी वाले देशों के बीच असमानता की खाई का दायरा लगभग दो गुना बड़ा हो चुका है.

उन्होंने कहा कि सूचना और संचार तकनीक यानी आई सी टी के ज़रिए असमानता के इस चलन को बदला जा सकता है.

ग़रीबों को भी ऐसे मौक़े मिलने चाहिए जिनके ज़रिए वो समय, ऊर्जा और प्रयासों की बर्बादी को रोककर तकनीक के फ़ायदे से अपनी ख़ुशहाली का रास्ता निकाल सकें.

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