29/08/2013

विकास लक्ष्यों के लिए तेज़ी पर ज़ोर

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि विभिन्न देशों की सरकारों ने ज़मीनी स्तर पर जो अहम काम किया है उससे सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों यानी Millennium Development Goals – MDGs को हासिल करने की दिशा में ठोस प्रगति हो सकी है.

नैदरलैंड में एक विश्वविद्यालय में भाषण के दौरान महासचिव ने कहा कि इन प्रयासों की वजह से ऐसे लोगों की संख्या आधी हो पाई है जो ग़रीबी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं.

इसके अलावा अब मलेरिया और टीबी की वजह से कम बच्चों की मौत हो रही है. दो अरब दस करोड़ से भी ज़्यादा लोगों को अब पीने का बेहतर पानी मिल पा रहा है.

लेकिन महासचिव ने आगाह भी किया कि अभी बहुत काम किया जाना बाक़ी है. पाँच साल से कम उम्र के 19 हज़ार बच्चे हर रोज़ ऐसी बीमारियों की वजह से अपनी जान गँवा देते हैं जिन्हें रोका जा सकता है.

ढाई अरब लोग अब भी ऐसे हैं जिन्हें साफ़-सुथरी परिस्थितियों में जीवन जीना नसीब नहीं है. अनेक सामाजिक समूहों और समुदायों के बीच असमानता और भेदभाव का दायरा और बढ़ रह है.

साथ ही, पर्यावरण स्थिरता अब भी एक गम्भीर चुनौती बनी हुई है. महासचिव बान की मून ने कहा कि हम सभी को अपने प्रयासों को मुख्य रूप से दो तरीक़े से बढ़ाना होगा.

पहला ये है – कि सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों यानी एम डी जी को हासिल करने के लिए हमारे पास एक हज़ार से भी कम दिन बचे हैं इसलिए हमें अपनी रफ़्तार और तेज़ करनी होगी.

और दूसरा ये – कि हमें वर्ष 2015 से आगे के समय के लिए भी एक विश्व एजेंडा बनाना होगा जिसमें ग़रीबी दूर करने और टिकाऊ विकास को मुख्य मुद्दा बनाया जाए.

महासचिव बान की मून ने कहा कि अगले महीने यानी सितम्बर में जब महासभा की बैठक के लिए विश्व नेता इकट्ठा होंगे तो यही दो मुख्य चुनौतियाँ प्रमुख विषय रहेंगी.

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