23/08/2013

म्याँमार में भाईचारा बढ़ाने का आग्रह

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म्याँमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष मानवाधिकार प्रतिनिधि टॉमस ओजिये क्विन्टाना ने म्याँमार के भीतर जातीय नफ़रत पर गहरी चिन्ता जताई है.

उन्होंने कहा है कि वहाँ मानवाधिकारों के हालात में तो कुछ सुधार हुआ है लेकिन विभिन्न जातीय समुदायों के बीच आपसी भाईचारे में बहुत कमी आई है जो एक गम्भीर चुनौती और ख़तरा है.

टॉमस क्विन्टाना ने हाल ही में म्याँमार के लिए अपना आठवाँ मिशन पूरा किया है.

उन्होंने कहा है कि विभिन्न जातीय और धार्मिक समुदायों के बीच नफ़रत बढ़ रही है और इस नफ़रत और धार्मिक भेदभाव को ख़त्म करना देश की सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है.

टॉमस क्विन्टाना ने कहा है कि म्याँमार सरकार को नफ़रत को और बढ़ने से रोकने के लिए ठोस प्रयास करने होंगे और विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए सार्वजनिक सन्देशों का सहारा लिया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार और क़ानून का शासन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस का सहारा लिया जाना चाहिए.

क्विन्टाना ने देश में विभिन्न जातीय और धार्मिक समुदायों के बीच बढ़ते अलगाव और खाई पर गहरी चिन्ता जताते हुए कहा कि ये बटवारा स्थाई रूप लेता जा रहा है और इसका सबसे ज़्यादा नकारात्मक असर मुसलमानों पर हो रहा है.

म्याँमार के लिए विशेष मानवाधिकार प्रतिनिधि टॉमस क्विन्टाना ने साम्प्रदायिक हिंसा से प्रभावित मीकतिला भी जाने की कोशिश की लेकिन उन्हें अपनी ये यात्रा वहाँ हो रहे प्रदर्शनों की वजह से बीच में ही रोकनी पड़ी.

मीकतिला में मुसलमानों को निशाना बनाते हुए ख़ासी बड़ी हिंसा हुई थी जिसमें कम से कम 43 लोगों की मौत हो गई और दस हज़ार से ज़्यादा मुसलमानों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं.

टॉमस क्विन्टाना का कहना था, "लगभग 200 लोगों ने मेरी कार को घेर लिया और कुछ तो उसके ऊपर चढ़ गए. उन्होंने कार के खिड़की, दरवाज़ों और शीशों को तोड़ने की भी कोशिश की. वो लोग भद्दी-भद्दी गालियाँ भी दे रहे थे."

"मैं इस बात को लेकर ख़ासा चिन्तित हूँ कि पास ही खड़ी पुलिस ने इन लोगों को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. मीकतिला में हुई हिंसा बहुत चिन्ताजनक घटनाक्रम है. मैं इस मुद्दे पर पहले ही म्याँमार सरकार से बातचीत कर चुका हूँ और मुझे उम्मीद है कि इस तरह की हिंसा भविष्य में नहीं होगी."

उन्होंने कहा कि "म्याँमार में कई दशकों से सशस्त्र संघर्ष चलता रहा है इसलिए सरकार के सामने ये चुनौती है कि वो ज़मीनी स्तर पर ऐसे उपाय शुरू करे जिससे विभिन्न जातीय समुदायों के बीच आपसी सदभाव स्थापित किया जा सका. ख़ासतौर से जातीय और छोटे समुदायों को ये लगना चाहिए कि उनकी बात को सुना जा रहा है और उनकी चिन्ताओं को दूर करने के लिए गम्भीर प्रयास किए जा रहे हैं."

क्विन्टाना ने कहा कि "शान्ति प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी भी बहुत महत्वपूर्ण है. अगर जातीय समुदायों और मुसलमानों को सुलह-सफ़ाई की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता है तो सफलता मुश्किल होगी."

उन्होंने कहा कि म्याँमार में अब भी बहुत से लोगों को नज़रबन्द बनाया हुआ है.

साथ ही क्विन्टाना ने सरकार से अनुरोध किया की वो इस वर्ष के अन्त तक सभी राजनीतिक क़ैदियों को बिना किसी शर्त के रिहा करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए सभी उपाय करे.

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