16/08/2013

हिंसा से लोकतन्त्र मुमकिन नहीं

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अन्तरराष्ट्रीय संसदीय संघ यानी आई पी यू ने कहा है कि मिस्र में अगर हिंसा और टकराव का रास्ता छोड़कर रचनात्मक बातचीत और सुलह सफ़ाई का रास्ता नहीं अपनाया जाता तो देश का भविष्य ख़तरे और आशंकाओं से भरा नज़र आता है.

आई पी यू ने कहा है कि मिस्र में सभी पक्षों को अड़ियल रुख़ छोड़कर लचीलापन दिखाना होगा.

आई पी यू की ये चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बुधवार को काहिरा में धरना और प्रदर्शन पर बैठे लोगों को हटाने के लिए सेना ने गोलियाँ चलाईं जिनमें 600 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई.

आई पी यू की प्रवक्ता जैमिनी पांड्या ने कहा है कि ये संगठन मिस्र के हालात पर बहुत चिन्तित और भयभीत है वहाँ लोकतन्त्र बहाली के लिए प्रयासरत है.

"हम समझते हैं कि टकराव और हिंसा छोड़कर रचनात्मक बातचीत के लिए जगह बनानी होगी जिसमें मिस्र के सभी पक्ष भाग ले सकें और राजनीतिक मतभेदों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर सुलह-सफ़ाई का माहौल बनाया जा सके. इसके अलावा और कोई रास्ता कारगर साबित नहीं हो सकता."

जैमिनी पांड्या का कहना था, "किसी भी राजनीतिक दल को अलग-थलग करने या देश में किसी भी विचारधारा वाली आवाज़ के लिए दरवाज़े बन्द करने से कोई हल नहीं निकलने वाला है. समाज के किसी वर्ग को नज़रअन्दाज़ करने से समाज में लोगों को मिलजुलकर रहने और एक दूसरे के विचारों का सम्मान करने का माहौल बनाना असम्भव होगा."

"ज़रूरी है कि समाज के सभी वर्गों के विचारों का सम्मान किया जाए ताकि लोगों की लोकतान्त्रिक आकांक्षाओं और उम्मीदों को पूरा करने के लिए उपयुक्त माहौल बनाया जा सके. इस बात को नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता कि मिस्र में पिछले कई वर्षों से लोग लोकतन्त्र के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनके संघर्ष के महत्व को कम नहीं किया जा सकता."

दुनिया भर की संसदों के इस संगठन आई पी यू ने मिस्र में तमाम पक्षों से ज़ोरदार अपील की है कि वो देश को संकट के गर्त में ढकेलने से बचें और संकट का कोई शान्तिपूर्ण हल निकालने के प्रयास करें.