16/08/2013

सबके लिए स्वास्थ्य सेवाएँ बहुत ज़रूरी

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विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने तमाम देशों का आहवान किया है कि वे तमाम लोगों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए स्थानीय स्तर पर शोध में धन अवश्य लगाते रहें.

संगठन का कहना है कि हर देश में वहाँ के हालात के लिए उपयुक्त स्वास्थ्य सेवाओं का ढाँचा मुहैया कराना बेहद ज़रूरी है ताकि सभी इन्सानों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें.

विश्व स्वास्थ्य रिपोर्ट-2013 चीन की राजधानी बेजिंग में गुरूवार को जारी की गई.

इस रिपोर्ट में संगठन ने कहा है कि Universal Health Coverage के ज़रिए तमाम देश ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि नागरिकों को ऐसी स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें जिनकी उन्हें ज़रूरत है, और ऐसा करने में उन पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी ना पड़े.

रिपोर्ट कहती है कि किसी भी देश में जब Universal Health Coverage का ढाँचा बनाया जाए तो उन्हें स्थानीय स्तर पर किए गए शोध नतीजे ये सुनिश्चित करने के लिए इस्तेमाल करने चाहिए कि किन स्वास्थ्य मुद्दों पर किस तरह ध्यान दिया जा सकता है.

साथ ही किसी स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाए और इस पूरी प्रक्रिया को क्या आकार दिया जाए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के स्वास्थ्य सूचना कार्यालय के डॉक्टर क्रिस्टोफ़र डाई का कहना था, "शोध और अनुसन्धान तो दुनिया भर में किया जाता है लेकिन हम जिस मुद्दे पर ज़ोर देना चाहते हैं वो ये है कि कम आमदनी और ज़्यादा आमदनी वाले देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध अलग-अलग तरीक़े से किए जाएँ, क्योंकि कम आमदनी और संसाधनों वाले देशों की कुछ ख़ास तरह की समस्याएँ होती हैं और उनके समाधान भी उन्हीं के अनुसार निकालने की ज़रूरत है."

"ज़्यादा आमदनी वाले देशों में हालात भिन्न होते हैं. हमें शोध करने के लिए एक बेहतर व्यवस्था बनानी होगी जिसमें संस्थानों और अन्य बुनियादी सेवाओं का निर्माण शामिल है. साथ ही धन जुटाने और उसे ख़र्च करने की भी एक ख़ास व्यवस्था बनानी होगी."

उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का एक मुख्य बिन्दू ये भी है कि जो लोग शोध और अनुसन्धान करते हैं उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण पर भी धन ख़र्च करना होगा."

"हमें आर्थिक शोध के लिए अन्तरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतर व्यवस्था बनानी होगी. हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें मौजूदा शोध और अनुसन्धान के नतीजों को पूरी दुनिया में बेहतर तरीक़े से इस्तेमाल किया जा सके."

रिपोर्ट कहती है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में घरेलू स्वास्थ्य शोध क्षेत्र में हर साल औसतन पाँच प्रतिशत की दर से निवेश बढ़ रहा है.

ख़ासतौर से ये चलन भारत, चीन और ब्राज़ील जैसे देशों में ज़्यादा देखने को मिल रहा है जहाँ Universal Health Coverage की अवधारणा को अपनाया गया है.

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