16/08/2013

सोशल मीडिया में नफ़रत पर चिन्ता

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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने गहरी चिन्ता जताते हुए कहा है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया नेटवर्कों पर नफ़रत भरी चर्चा ज़ोर पकड़ रही है और ये चलन पूरी दुनिया में जगह बना रहा है.

मानवाधिकार उपायुक्त फ्लेविया पन्सीरी ने कहा कि नफ़रत भरी चर्चा और सामग्री की पहचान करने और इसे रोकने में गम्भीर समस्या इसलिए भी आ रही है क्योंकि विश्व स्तर पर इसकी कोई एक निश्चित और एकमत परिभाषा नहीं है.

नस्लभेद के ख़ात्मे के लिए बनी समिति – CERD की जिनेवा में सोमवार को हुई बैठक में फ्लेविया पन्सीरी ने ये चिन्ता व्यक्त की.

उन्होंने कहा कि स्कूलों में मानवाधिकार सम्बन्धी शिक्षा दिए जाने से तमाम तरह के भेदभाव और असहिष्णुता व नफ़रत भरे व्यवहार को रोकने में काफ़ी मदद मिल सकती है, "विचार व्यक्त करने की आज़ादी यानी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता की हद क्या है कि ये आज़ादी किस बिन्दु से नफ़रत भरे विचारों में बदल जाती है जिससे दूसरों का सम्मान आहत होता है."

"हमें ये भी देखना होगा कि वो कौन सा बिन्दु होता है जब हमारे किसी एक अधिकार का प्रयोग करने से किसी अन्य व्यक्ति के किसी अन्य अधिकार का उल्लंघन ना होता हो. अगर ऐसा है तो हमारे उस अधिकार का प्रयोग नहीं किया जा सकता. हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि सभी नागरिकों के सभी अधिकारों का ना सिर्फ़ सम्मान किया जाए बल्कि उन्हें पूरी हिफ़ाज़त मिले."

समिति ने इस सत्र में चिली, चाड, वेनेज़ुएला, बुर्किना फासो, बेलारूस, जमैका, स्वीडन और साईप्रस की रिपोर्टों की भी समीक्षा की.