16/08/2013

प्रवासन:ग़रीबी हटाने का नुस्ख़ा

सुनिए /

बारह अगस्त को अन्तरराष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया है जिसका मुख्य विषय 'युवा प्रवासन: विकास को आगे ले जाना' रहा.

इस अवसर पर कहा गया कि बहुत से युवाओं को शिक्षा, रोज़गार व कामकाज और बेहतर जीवन शैली की तलाश में अपना घर और जन्म स्थान छोड़कर दूरदराज़ के इलाक़ों में जाना पड़ता है जिसे युवा विस्थापन कहा जाता है.

इस मुद्दे पर ख़ास चर्चा हुई कि जब ऐसे युवा किसी दूसरे स्थान या दूसरे देश में जाते हैं तो वो वहाँ किस तरह से अपने हालात को बेहतर बना सकते हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी संगठन यानी आई ओ एम के प्रवक्ता जुम्बी जुम्बी का कहना था कि अपना देश छोड़कर दूसरे देश में जाकर बसने और कामकाज करने वाले युवाओं के साथ सम्पर्क क़ायम करना और उन्हें सशक्त बनाना बेहद ज़रूरी है ताकि वो अपने अन्दर मौजूद प्रगति और सफलता की सम्भावनाओं को पूरा कर सकें.

ऐसा करना इसलिए भी ज़रूरी है कि एक नए देश में उनके जाने और वहाँ बसने और कामकाज करने को सुरक्षित, सफल और फ़ायदे वाला क़दम और फ़ैसला बनाया जा सके.

प्रवक्ता जुम्बी जुम्बी का कहना था, "ग़रीबी से छुटकारा पाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाकर बसने और कामकाज करने को एक बहुत ही कामयाब रणनीति समझा जाता है. युवा लोगों ने इस रणनीति को अपनाकर बदलाव और विकास करके दिखाया है."

"अपना देश छोड़कर दूसरे देश में जाकर बसने और कामकाज करने वाले युवाओं की संख्या क़रीब दो करोड़ 70 लाख तक पहुँच चुकी है. अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासियों की संख्या लगभग साढ़े 21 करोड़ है. स्थान और देश बदलने वाले युवाओं को अगर अपने विकल्पों के बारे में समुचित जानकारी हो तो वो अपने भविष्य और विकल्पों के बारे में ज़्यादा बेहतर और जागरूक फ़ैसले ले सकते हैं."

संगठन का कहना है कि नियमित और अनियमित चैनलों के ज़रिए प्रवासन करने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है.

ऐसे में अगर इन युवाओं को एक देश छोड़कर दूसरे देश में जाकर बसने और कामकाज करने के ख़तरों के बारे में जागरूक बना दिया जाए तो उनके शोषण और नुक़सान को कम किया जा सकता है.

आई ओ एम स्कूलों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि सम्भावित प्रवासन करने वाले युवाओं को अपने अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के बारे में जागरूक और शिक्षित किया जा सके.

Loading the player ...

कनेक्ट