8/08/2013

परमाणु बमों की भयावहता का स्मरण

सुनिए /

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाखी पर गिराए गए परमाणु बमों से हुए भीषण नुक़सान की भयावहता को याद किया गया है.

जापान के लोग तभी से कोशिश करते रहे हैं कि परमाणु हथियारों को दुनिया से बिल्कुल ख़त्म कर देना चाहिए क्योंकि उन्होंने इन हथियारों के इस्तेमाल की भयावहता को बहुत नज़दीक से देखा है.

मंगलवार को जिनेवा में निरस्त्रीकरण पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन आयोजित किया गया.

इस सम्मेलन में जापान के राजदूत मारी अमानो इसी तरफ़ ध्यान दिलाने की कोशिश की कि उन बमों के गिराए जाने के 68 वर्ष बाद भी उसका डर लोगों के दिलों से निकल नहीं पाया है क्योंकि तब से तमाम पीढ़ियाँ उसके साए में जीने को मजबूर हैं.

जापानी राजदूत मारी अमानो ने कहा कि जापान अकेला ऐसा देश है जिसने परमाणु बमों का क़हर देखा है, "जापानी लोग 1945 से ही परमाणु हथियारों को दुनिया से पूरी तरह ख़त्म करने के लिए अभियान चलाते रहे हैं लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है."

"मेरे ख़याल में ये एक ऐसा लक्ष्य है जिसे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय हासिल करना चाहता है. वैसे तो परमाणु हथियारों की संख्या में कमी हो रही है लेकिन जापान परमाणु हथियारों की मौजूदा संख्या से भी सन्तुष्ट नहीं है."

उन्होंने कहा कि "ख़ासतौर से जबकि हम सभी परमाणु हथियारों के नुक़सान को भलीभाँति देख और समझ चुके हैं कि सिर्फ़ एक परमाणु बम का हमला मानव जाति के लिए कितना घातक साबित हो सकता है."

राजदूत मारी अमानो ने बताया कि हिरोशिमा में मंगलवार, छह अगस्त और नागासाखी में शुक्रवार, 9 अगस्त को शान्ति स्मरण सभाओं का आयोजन किया गया.

ध्यान देने की बात है कि 1945 में छह अगस्त को हिरोशिमा और नौ अगस्त को नागासाखी में परमाणु बम गिराए गए थे.

Loading the player ...

कनेक्ट