3/08/2013

स्तनपान : अमृत समान

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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष संस्था यानी यूनीसेफ़ ने कहा है कि इतिहास और अनुभव ये बताता है कि बच्चों के लिए माँ का दूध सबसे असरदार औषधि है. दूसरे शब्दों में कहें तो स्तनपान बच्चों की ज़िन्दगी के लिए अमृत समान होता है.

संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व स्तर पर स्तनपान सप्ताह मनाने के अवसर पर बच्चे के लिए माँ के दूध की अहमियत का सन्देश देने के प्रयास किए गए हैं.

यूनीसेफ़ का कहना है कि स्तनपान किसी भी बच्चे की जान बचाने और उसे स्वस्थ रखने के लिए सबसे किफ़ायती और असरदार तरीक़ा साबित हुआ है. यूनीसेफ़ की कार्यकारी उपनिदेशक गीता राव गुप्ता माँ के दूध को शिशु की रोग निरोधक क्षमता के लिए पहली रामबाण औषधि मानती हैं.

आँकड़ों से पता चलता है कि जिन बच्चों को जन्म के पहले छह महीनों के दौरान सिर्फ़ माँ का दूध पिलाया जाता है उनके जीवित रहने की सम्भावना 14 गुना ज़्यादा होती है. जबकि जिन बच्चों को माँ का दूध नहीं पिलाया जाता है, पहले छह महीनों के दौरान उनके जीवन को 14 गुना ज़्यादा ख़तरा होता है.

जन्म के बिल्कुल बाद से ही माँ का दूध पिलाना शुरू करने से शिशु की मौत का ख़तरा 45 प्रतिशत तक कम हो जाता है.

ग़ौर करने की बात है कि माँ का दूध अच्छी तरह से मिलने से बच्चे में तेज़ी से सीखने की क्षमता बढ़ती है, साथ ही इससे बच्चे के मोटा होने का ख़तरा कम होता है और आगे चलकर जीवन में अनेक बीमारियों से भी सुरक्षा रहती है.

ऐसे में जबकि दुनिया भर में माँ के दूध के फ़ायदे साबित हो चुके हैं, अफ़सोस की बात ये है कि पिछले वर्ष यानी 2012 में जन्म के बाद पहले छह महीनों के दौरान सिर्फ़ 39 प्रतिशत बच्चों को ही मुख्य रूप से माँ का दूध नसीब हुआ.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉक्टर मारिया डेल कारमेन कैसानोवास का कहना था कि नई नई माँ बनने वाली महिलाओं को मिलने वाली जानकारी और सूचना की परख करना भी ज़रूरी है, "अक्सर पता चलता है कि जो सूचना और जानकारी महिलाओं को दी जाती है, वो सही नहीं होती है. मिसाल के तौर पर, बच्चों को जन्म देने वाली बहुत सी महिलाएँ ये भी सोच सकती हैं कि शिशुओं के लिए बाज़ार में मिलने वाले दुग्ध उत्पादन भी माँ के दूध की ही तरह उपयोगी और कारगर हो सकते हैं.”

“ये भी हो सकता है कि बहुत सी महिलाएँ बाज़ार में मिलने वाले इन उत्पादों को माँ के दूध से कहीं बेहतर समझती हों. इसलिए ये बहुत ज़रूरी है कि बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को सही जानकारी मिले और उन्हें बाज़ार के प्रभाव से बचाकर रखा जाए."

यूनीसेफ़ का कहना है कि ऐसा माहौल बनाना बहुत ज़रूरी है जिसमें स्तनपान को सामान्य आदत बना दिया जाए जिससे महिलाएँ अपने शिशुओं के लिए इसके फ़ायदों को नज़रअन्दाज़ ना कर पाएँ.

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