3/08/2013

भारत में बच्चों का मज़दूरी से बचाव

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अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आई एल ओ भारत में बच्चों को मज़दूरी से बचाने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और ज़िला स्तर पर कार्य कर रहा है.

आई एल ओ ने 'Convergence Project' नामक इस परियोजना को फिलहाल पाँच राज्यों में चलाया हुआ है.

इसे बाल मज़दूरी समाप्त करने के अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम को अमरीका सरकार के श्रम मंत्रालय का भी सहयोग और सहायता मिल रहे हैं.

चूँकि बहुत से बच्चे बाल मज़दूरी करने के लिए अपनी शिक्षा अधूरी ही छोड़ देते हैं इसलिए इस परियोजना का एक मुख्य उद्देश्य बच्चों की शिक्षा बहाल करना भी है.

इसके तहत कुछ बड़े हो चुके बच्चों को ऐसा कामकाज भी सिखाया जाता है जिससे वो रोज़गार भी कमा सकें और उनकी शिक्षा भी ना छूटे.

इस कार्यक्रम में बच्चों के माता-पिता और समुदायों से भी सम्पर्क किया गया है जिससे बहुत से लोग कुछ बड़े हो चुके बच्चों को फिर से स्कूल भेजने को राज़ी हो गए हैं.

इस कार्यक्रम में पाँच राज्यों के दो-दो ज़िलों में चुनिन्दा परिवारों को रोज़गार के संसाधन मुहैया कराए गए हैं जिनसे वे आत्मनिर्भर हो सकें और उन्हें अपने बच्चों को बाल मज़दूरी के लिए भेजने की ज़रूरत ना पड़े और वो स्कूल जाकर शिक्षा हासिल कर सकें.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अनेक ग़ैरसरकारी संगठनों के इस मिशन से लाभान्वित होने वाले ज़िले हैं – बिहार के सीतामढ़ी और कटियार, झारखंड के साहिबगंज और राँची, गुजरात के वड़ोदरा और सूरत, मध्य प्रदेश के जबलपुर और उज्जैन, और उड़ीसा के कटक और कालाहाँडी. इस कार्यक्रम के तहत 5 से 14 वर्ष के 48 हज़ार बच्चों को फ़ायदा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है.

कार्यक्रम का लक्ष्य इन बच्चों को ख़तरनाक काम के चंगुल से निकालना है जहाँ वो अपने परिवार के लिए आमदनी जुटाने के वास्ते अपनी जान जोखिम में डालकर बाल मज़दूरी करते हैं.

इनमें अगरबत्ती और बीड़ी बनाना, टूटे-फूटे टिन और लोहे के टुकड़े बीनना, कोयला इकट्ठा करना, इमारती काम करना, सड़कों के किनारे बने ढाबों में काम करना, पटाख़े बनाने वाली फ़ैक्टरियों में काम करना, मौटर गैराज और वैल्डिंग का काम करना, पोलीथीन इकट्ठा करना और कूड़ा करकट उठाना, पत्थर तोड़ना, कपड़ों पर कढ़ाई का काम करना, बुनाई और रंगाई जैसे ख़तरनाक काम शामिल हैं.

 

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