26/07/2013

इसराइली अरबों के बेघर होने का ख़तरा

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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि अगर इसराइली संसद एक नया विधेयक पारित कर देती है तो अरब बेडाउइन समुदाय के लगभग चालीस हज़ार लोगों के सिर पर ज़बरदस्ती उनके घरों से निकालने का ख़तरा मंडराने लगेगा.

इस नए विधेयक में नीगेव रेगिस्तान में बसे हुए क़रीब 35 गाँवों को उखाड़ फेंकने का प्रस्ताव रखा गया है.

मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि अगर ये संसदीय प्रस्ताव पारित होकर क़ानून बन जाता है तो क़रीब चालीस हज़ार अरब लोग बेघर हो जाएंगे.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लई ने कहा है कि ये नया क़ानून इसराइल में अल्पसंख्यकों के अधिकार कम करने का एक और हथियार है.

उन्होंने ये भी कहा कि ये दिखाता है कि इसराइल किस तरह लगातार अपने अरब नागरिकों के ख़िलाफ़ भेदभाव वाली नीतियाँ अपनाता रहा है.

नवी पिल्लई ने कहा कि अगर इसराइली संसद ये नया क़ानून बना देती है तो अरब नागरिकों को अपने घर छोड़ने पडेंगे, उनसे ज़मीन का मालिकाना हक़ रखने का अधिकार भी छिन जाएगा.

विकास के नाम पर इन अरब नागरिकों को उनकी संस्कृति और सामाजिक जीवन से वंचित कर दिया जाएगा.

नवी पिल्लई ने आहवान किया कि ऐसी किसी भी प्रकिया में नीगेव के अरब निवासियों से सलाह-मश्विरा करते हुए उनकी राय को वज़न दिया जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविले का कहना था, "कुछ सलाह मश्विरा तो किया गया था लेकिन बहुत से ग़ैर सरकारी संगठनों के साथ-साथ हमारे भी ये विचार हैं कि इस सलाह मश्विरे में अरब नागरिकों को पूरी तरह से शामिल नहीं किया गया, अरब नागरिकों के विचारों को कोई अहमियत नहीं दी गई. ये सब कुछ नीहित स्वार्थों और इरादों से किया जा रहा है."

"नीगेव रेगिस्तान में रहने वाले अरब लोग भी इसराइली नागरिक हैं और अन्य नागरिकों की ही तरह उनके भी अपने अधिकार हैं. अरब नागरिक अगर किसी इलाक़े में बहुत लम्बे समय से रहते रहे हैं तो उन्हें भी वहाँ ज़मीन का मालिकाना हक़ मिलना चाहिए."

रूपर्ट कालविले ने कहा कि अरब नागरिकों को भी अन्य इसराइली नागरिकों की ही तरह सम्मान मिलना चाहिए. अन्य नागरिकों की ही तरह इन अरब नागरिकों की भी बात सुनी जानी चाहिए और उनकी राय को वज़न मिलना चाहिए.

मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने ये भी कहा कि ये नया क़ानून उस इसराइली आयोग की सिफ़ारिशों के भी ख़िलाफ़ है जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.

इस आयोग ने अरब नागरिकों को भी इसराइल के अन्य नागरिकों के समान दर्जा और सम्मान देने और दक्षिणी इसराइल स्थित नीगेव रेगिस्तान में उनके निवास को वैध ठहराने की सिफ़ारिश की थी.