3/11/2017

कार्बन डाइ ऑक्साइड क्यों बढ़ रही है

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हम सब अपनी गतिविधियों पर और आसपास नज़र डालें तो Pollution यानी प्रदूषण बढ़ाने के बहुत से तरीक़े नज़र आ जाएंगे.

इनमें वाहनों की बढ़ती संख्या, एयरकंडीशनिंग का बढ़ता चलन और कोयले और लकड़ियों के ईंधन का इस्तेमाल बहुत हद तक बढ़ते प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार है.

इन्हीं हालात के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा रिकॉर्ड तेज़ी से बढ़ी है और साल 2016 में ये बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई.

विश्व मौसम संगठन ने सोमवार को जिनेवा में Greenhouse Gas Bulletin जारी करते हुए ये चेतावनी भरी रिपोर्ट पेश की.

“हालात का तक़ाज़ा है कि बढ़ते तापमान के असर को कम करने के लिए पूरी दुनिया को ठोस उपाय करने की सख़्त ज़रूरत है. हमें अगर दुनिया के बढ़ते तापमान को इस सदी में दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है, जैसाकि पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में प्रावधान है, तो हम सभी को बहुत गम्भीरता दिखानी होगी.”

रिपोर्ट बताती है कि साल 2015 में कार्बन डाइ ऑक्साइड का Concentration 400 parts per million था जो साल 2016 में बढ़कर 403.3 parts per million पर पहुँच गया.

विश्व मौसम संगठन के पैटेरा ताआलास ने तमाम देशों की सरकारों से आग्रह किया कि पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते को संजीदगी के साथ लागू करने के उपाय करें ताकि वैश्विक तापमान को क़ाबू में लाया जा सके.

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अतीत में किसी एक साल के दौरान कार्बन डाइ ऑक्साइड की इतनी तेज़ी से बढ़ोत्तरी कभी नहीं हुई है.

विश्व मौसम संगठन के एक विशेषज्ञ पैटेरा ताआलास का कहना था, “इन आँकड़ों से साफ़ नज़र आता है कि दुनिया क़तई भी सही दिशा में नहीं बढ़ रही है. सही बात तो ये है कि अगर हम पेरिस जलवायु परिवर्तम समझौते को लागू करने और उसे असरदार बनाने के बारे में सोचें तो हम सभी ग़लत दिशा में बढ़ रहे हैं.”

“हालात का तक़ाज़ा है कि बढ़ते तापमान के असर को कम करने के लिए पूरी दुनिया को ठोस उपाय करने की सख़्त ज़रूरत है. हमें अगर दुनिया के बढ़ते तापमान को इस सदी में दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है, जैसाकि पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में प्रावधान है, तो हम सभी को बहुत गम्भीरता दिखानी होगी.”

संगठन की इस रिपोर्ट में पूरी दुनिया के इलाक़ों से लिए गए आँकड़े शामिल किए गए हैं.

रिपोर्ट कहती है कि साल 2016 में कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर बढ़ने के लिए मुख्य रूप से इंसानी गतिविधियाँ और अल नीनो हालात ज़िम्मेदार हैं.

अल नीनो के हालात समुद्री पानी का तापमान औसत से ज़्यादा गरम होने की वजह से पैदा होते हैं.

इन हालात की वजह से ट्रॉपिकल इलाक़ों में सूखा पड़ जाता है. और अनेक इलाक़ों में समुद्री तूफ़ान और जंगलों में आग लगने लगती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इन सब हालात को भी देखें तो साल 2016 में कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर में 3.3 parts per million की बढ़ोत्तरी बहुत चिन्ताजनक बात है.

क्योंकि साल 1998 में भी अल नीनो के इसी तरह के हालात पैदा हुए थे मगर तब कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर में 2.7 parts per million की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी.

रिपोर्ट प्रस्तुति : महबूब ख़ान

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