19/07/2013

नेलसन मंडेला को ख़ास सम्मान

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गुरूवार, 18 जुलाई को नेलसन मंडेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया जिस अवसर पर पूरी दुनिया में लोगों को दूसरे लोगों के लिए कुछ करने के लिए प्रोत्साहित किया गया.

18 जुलाई को नेलसन मंडेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस इसलिए रखा गया क्योंकि सार्वजनिक सेवा के लिए अपना जीवन लगा देने वाले दक्षिण अफ्रीका इस पूर्व राष्ट्रपति ने इस दिन यानी गुरूवार को 95 वर्ष की उम्र हासिल कर ली है और ये उनका 94वाँ जन्म दिवस था.

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2009 में 18 जुलाई को नेलसन मंडेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस मनाना शुरू किया था.

1998 में जब नेलसन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थे तो उन्होंने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को सम्बोधित किया था, "ये सम्भवतः मेरा आख़िरी मौका है कि मुझे महासभा के इस मंच से आप सबको सम्बोधित करने का ये सम्मान प्राप्त हुआ है. मैं एक ऐसा व्यक्ति जिसकी पैदाइश तब हुई जब प्रथम विश्व युद्ध दस्तक दे चुका था, और जिसने सार्वजनिक सेवा को तब अलविदा कहा जब सारी दुनिया मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणा पत्र यानी Universal Declaration of Human Rights की आधी सदी मना रही थी."

"अब मैं ज़िन्दगी के उस मुक़ाम पर पहुँच गया हूँ जहाँ मैं अपने उस गाँव में जाकर कुछ आराम कर सकूँ, शान्ति के साथ समय बिता सकूँ, जहाँ मेरा जन्म हुआ था. और ऐसा मौक़ा सभी पुरुषों और महिलाओं को मिलना चाहिए."

नेलसन मंडेला ने कहा, "मैं जब अपने गाँव में बैठकर चारों तरफ़ देखता हूँ तो ये अहसास होता है कि वहाँ की पहाड़ियों की ही तरह में भी पुरातन की तरफ़ बढ़ रहा हूँ. साथ ही मेरे भीतर ये उम्मीद भी जगी हुई है कि हमारे देश, क्षेत्र और पूरी दुनिया में नेताओं का एक ऐसा कैडर तैयार हो गया है जो लोगों को उनकी आज़ादी से वंचित नहीं होने देगा, जैसा कि हमें किया गया था. किसी को बेघर होकर कहीं और पनाह लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा जैसाकि हमें दरबदर भटकना पड़ा था.

उन्होंने कहा, "मैं अपनी ये उम्मीद बरक़रार रखूंगा कि अफ्रीका में हुआ जागरण गहरी जड़ें जमा लेगा और वहाँ से परिवर्तन और विकास की नई कोंपलें लगातार फूटती रहेंगी, जिन पर पतझड़ का कोई असर नहीं होगा. जब इन उम्मीदों को साकार हो सकने वाले सपनों में तब्दील किया जा सकेगा, तब मुझे असली शान्ति और सुकून हासिल होगा. तब इतिहास और सारी दुनिया में रहने वाले अरबों लोग कहेंगे कि हमने जो सपना देखा था वो सही था और हमने अपने उस सपने को साकार करने के लिए अपनी ज़िन्दगी ख़र्च कर दी. धन्यवाद."

उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अपील करते हुए कहा कि ये एक ऐसा मौक़ा है जब एक वैश्विक नेता के जीवन और कामकाज पर गहन विचार विमर्श किया गया है. ख़ासतौर से ऐसे समय में ये और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब ये नेता अस्पताल में अपने स्वास्थ्य से जूझ रहा है.