चार देशों में दो करोड़ लोगों को जीने लायक़ भोजन नहीं नसीब हो रहा है. मालूम नहीं कौन ज़िम्मेदार है.
24/02/2017 / सुनिए /

हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

ILO-domestic
अच्छी आमदनी और प्रतिष्ठा वाले कामकाज की तलाश में बहुत से लोग चिन्ता और अनिश्चितता के गर्त में...
24/02/2017 / सुनिए /

इस कश में ऐसा क्या है भला

UNODC Afghanistan
कुछ लोग ग़म भुलाने के लिए नशे का दम या कश लगाते हैं, मगर कहीं ये कश उनकी जान ही ना ले ले.
17/02/2017 / सुनिए /

Depression की भेंट चढ़ती ज़िन्दगी

Depression
दुनिया भर में करोड़ों लोग Depression के शिकार हैं, कुछ को मालूम ही नहीं है और कुछ की ज़िन्दगी पिघल रही है
24/02/2017 / सुनिए /

क्या सुलह-सफ़ाई इतनी मुश्किल है

SG_Munich-SDG
हर जगह अदावतों और लड़ाई-झगड़ों का माहौल है जिसे सुलझाने के लिए अमन-चैन की कूटनीति की दरकार है.
24/02/2017 / सुनिए /

मातृ भाषा में सीखना आसान

Child_Nepal_MotherLanguage
बच्चे और वयस्क अपनी मातृ भाषा में आसानी से सीखते हैं इसलिए तालीम मातृभाषा में मिलना ज़रूरी.
24/02/2017 / सुनिए /

टेलीवर्किंग का बढ़ता चलन

Mobile-Use
मोबाइल टैक्नॉलोजी की वजह से टेलीवर्किंग का चलन बढ़ रहा है जिसके फ़ायदे हैं तो कुछ नुक़सान भी.
17/02/2017 / सुनिए /

परिक्रमा 24 फ़रवरी 2017
परिक्रमा 24 फ़रवरी 2017
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